जयपुर। आमेर रोड स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के मौलिक सिद्धांत विभाग में मरीजों के लिए बनाई गई औषधि के प्रयोग से पूर्व हवन किया गया। हवन का उद्देश्य यह था कि हवन के प्रभाव से औषधि की गुणवत्ता और प्रभावोत्पादका में कितनी वृद्धि होती है। यज्ञ का प्रभाव देख सभी शोध कर्ता आश्चर्य से दंग रह गए।
गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी से विदुषी गायत्री कचोलिया और गायत्री तोमर ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ करवाया। उन्होंने विभिन्न रिसर्च पेपर के हवाले से बताया कि यज्ञ का प्रभाव व्यक्ति के शरीर ही नहीं मन पर भी पड़ता है। यहां तक की यज्ञ के प्रभाव से पानी और जमीन की गुणवत्ता भी सुधरती है। यह विभिन्न शोधों में प्रमाणित हो चुका है।
उल्लेखनीय है कि रिसर्चर डॉ फातिमा, डॉ लालचंद, डॉ शीतल ने रिसर्च के लिए प्रयुक्त हो रही औषधि के उपयोग के पहले यज्ञ करवाकर वैदिक ग्रंथों में किए गए दावों का परीक्षण के लिए यह प्रयोग करवाया। हवन में विदेशी शोधकर्ता भी उपस्थित रहे। विभागाध्यक्ष डॉ निशा गुप्ता, डॉ शैलजा भटनागर, डॉ अभिजीत, डॉ अनिल शर्मा, डॉ प्रवीण सहित ईरान से आई शोधार्थी डॉ फातिमा, वेस्ट इंडीज से आए डॉ अविनेश नरैन सहित 22 देशों से आए शोधार्थियों ने औषधियों पर हवन के प्रभाव को नजदीक से देखा। यज्ञ का आयोजन डॉ अजीत तिवारी ने किया।




















