जयपुर। बजट पूर्व परिचर्चा में गायत्री परिवार की महिलाओं ने मुख्यमंत्री कार्यालय में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी के समक्ष महिला कल्याण और जन कल्याण से जुड़े सुझाव दिए। राजस्थान नारी संगठन प्रभारी गायत्री कचोलिया और गर्भ संस्कार जिला सह समन्वयक कुसुम लता सिंघल ने गायत्री परिवार की ओर से आधा दर्जन सुझाव दिए। इनमें गर्भस्थ शिशु के सर्वांगीण विकास के लिए सभी अस्पतालों, नर्सिंग कॉलेजों, मेडिकल कॉलेज में गर्भ संस्कार की वर्कशॉप अनिवार्य करने पर जोर दिया गया।
इस वर्कशॉप में गर्भवती महिलाओं को भी शामिल किया जाए। पर्यावरण प्रदूष्ण आज एक बड़ी समस्या बन गया है। हवन इसे खत्म करने का सशक्त माध्यम बन सकता है। आयुर्वेद में इसे धूपन क्रिया के नाम से पढ़ाया भी जाता है। इसके लिए भी वर्कशॉप आयोजित करने का सुझाव दिया। इसके अलावा महिलाओं के लिए सामुदायिक रसोई की स्थापना का सुझाव दिया गया। क्योंकि राजस्थान के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाएं परंपरागत चूल्हे पर भोजन बनाने को विवश हैं।
वहीं शहरी क्षेत्रों की दूर-दराज एवं कच्ची बस्तियों में भी यही स्थिति देखने को मिलती है। इससे महिलाओं के स्वास्थ्य, समय और ऊर्जा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए आवश्यकता अनुसार सुव्यवस्थित सामुदायिक रसोई की स्थापना की जाए, जहां महिलाएं सामूहिक रूप से भोजन बना सकें, तैयार भोजन, पानी, दूध गर्म करने की समुचित सुविधा हो, कम से कम 10 महिलाएं एक साथ सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण में भोजन बना सकें।
इन सामुदायिक रसोईयों के संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी किसी संबंधित विभाग, स्थानीय संस्था अथवा पंजीकृत स्वयंसेवी संस्था को सौंपी जा सकती है तथा समय-समय पर उनकी मॉनीटरिंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।




















