चावल के दाने पर उकेरा राम मंदिर

जयपुर। अयोध्या धाम में राम मंदिर के निर्माण और रामलला की मूर्ति प्राण -प्रतिष्ठा को लेकर देश-विदेश में हर नागरिक में अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है। भगवान श्रीराम के लिए कोई तन से ,कोई मन से तो हीरे मोती ,चांदी ,सोना कीमती उपहार अयोध्या नगरी में प्रतिदिन भेज रहा है।

तो कोई पेंसिल पर श्रीराम की वनवासी स्वरूप को बना कर अयोध्या के म्यूजिम में भेजने की चाहत कर रहा है। अब श्रीराम की भक्ति में लीन राजस्थान के रहने वाले आर्टिस्ट डॉ राम सिंह राजोरिया ने एक चावल के दाने पर राम मंदिर बनाया है। सूक्ष्म कला में माहिर डॉ राम सिंह की कामना है कि उनके द्वारा बनाई गई कुछ कलाकृतियां राम मंदिर अयोध्या में रखी जाए।

पूर्व में कर चुके है कई कलाकृतियों का निर्माण

डॉ राम सिंह राजोरिया कई ऐसी चीजे बना चुके हैं जिसे देखते ही व्यक्ति दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाता है। वे चावल के एक दाने पर 203 हाथी, मात्र एक दाने पर 4000 अक्षर, गायत्री मंत्र, णमोकार जैन मंत्र, ओमकार मंत्र, सिक्खों 10 गुरुओं के नाम, गणेश जी की 21 प्रतिमा, भगवान बुद्ध की तस्वीर, महात्मा गांधी, भगवान शिव, तिरुपति बालाजी, महात्मा गांधी, रामकृष्ण के चित्र को चावल के एक दाने पर लिख चुके है।

दो वर्ष में बनाई सूक्ष्मतम श्रीमद भागवत गीता

इन सभी कार्यों से भी बढक़र इन्होंने विश्व की सूक्ष्मतम हस्तलिखित श्रीमद् भागवत गीता बनाई है। यह दिव्यतम गीता का भव्यतम स्वरूप है। इस दिव्यतम गीता के 18 अध्याय 700 श्लोक संस्कृत भाषा में जिसकी लंबाई 5 इंच ओर चौड़ाई 3.5 इंच है। यह श्रीमद् भागवत गीता स्पेशल एक्रेलिक शीट पर एक खास तरह की नीडल द्वारा खुदाई करके बनाई गई है। इस गीता को बनाने में डॉ राम सिंह को 10 से 12 घंटे प्रतिदिन एवं 2 वर्ष का समय लगा। संयुक्त भारतीय धर्म संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य राजेश्वर को आर्टिस्ट राम सिंह ने चावल के दाने पर राम मंदिर का फोटो, 151 बार राम नाम लिखकर भेंट किए।

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