June 21, 2024, 9:40 pm
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500 साल बाद 22 जनवरी को मनेगी दूसरी दिवाली

जयपुर। अयोध्या धाम में राम मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन राजधानी जयपुर भी राममय होगा। 500 साल के संघर्ष के बाद राम मंदिर का निर्माण 22 जनवरी को होने जा रहा है। इस मौके पर पूरे देश में दीपावली मनाई जाएगी। राजधानी में 100 से अधिक मंदिरों में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम बड़ी स्क्रीम एलईडी पर लाइव प्रसारण किया जाएगा।

राजधानी में दीपावली की तरह मंदिरों और घरों में रंग -बिरंगी लाइटों से सजाया जाएगा और मंदिरों और घरों में दीपक जलाए जाएंगे।

घरों में अयोध्या से पूजित अक्षत व पत्रक ,राम मंदिर को फोटो की जाएगी वितरित

अयोध्या धाम में श्रीराम लला की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले 15 जनवरी तक प्रत्येक घरों में श्रीराम जन्म भूमि से पूजित अक्षत के साथ पत्रक ,राम मंदिर की फोटो वितरित की जाएगी। जिसके लिए विश्व हिंदू परिषद ने अलग-अलग टोलिया बनाई है।

दर्जनों कॉलोनियों में निकाली जाएगी कलश यात्रा

जिले भर में अक्षत वितरण के लिए कलश यात्रा निकाली जा रही है। रविवार को छोटी काशी में दर्जनों कॉलोनियों में अक्षत यात्रा निकाली जा रही है। विश्व हिंदू परिषद राजस्थान के क्षेत्रीय संगठन मंत्री राजाराम ने बताया कि 22 जनवरी को राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के दिन हर घर में दीपावली मने ,हर मंदिर में त्यौहार मने इसका उत्तरदायित्व समाज के हर जागरूक लोगों का है। कई लोग ऐसे भी है जो कहीं कारणों के चलते अयोध्या धाम नहीं पहुंच सकते ,इसके लिए मंदिरों मे बड़ी स्क्रीन पर लाइव प्रसारण किया जाएगा। अयोध्या धाम नहीं पहुंचने वाले लोग अपने पास के ही मंदिर में जाकर लाइव प्रसारण देख सकते है।

मंदिरों में चलेगे धार्मिक कार्यक्रम

श्रीराम लला की प्राण-प्रतिष्ठा वाले दिन राजधानी के अलग-अलग मंदिरों में दिन भर भजन कीर्तन ,हवन सुंदरकांड के पाठ ,हनुमान चालीसा के पाठ ,सामूहिक आरती आदि धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मंदिरों की व्यवस्था के लिए कमेटियों तैयार की जा रहीं है।

एक से घर-घर अक्षत वितरण:

अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व एक जनवरी से अक्षत वितरण किया जाएगा। इसके लिए शहर को कई भागों में बांटा गया है।  अयोध्या से पूजित अक्षत पहुंच चुके है। कार्यकर्ता एवं स्वयंसेवक अक्षत वितरण करेंगे। टोलियां अक्षत वितरण करेंगी।

इसलिए बांटे जा रहे अक्षत

ज्योतिषाचार्य राजेन्द्र शास्त्री ने बताया कि अक्षत का तात्पर्य यह है कि जिसका कभी क्षय ना हो। इसलिए ही पूजा-पाठ में अक्षत चढ़ाया जाता है जो कि संकल्पित कामना हम भगवान की पूजन के लिए रखते है, उसे वह संपूर्ण रूप से में प्राप्त हो सकें और अखंडता की प्राप्ति हो। अक्षत को शुद्ध अनाज माना जाता है। अक्षत धान में बंद होता है ,जिसे पशु-पक्षी झूठा नहीं कर पाते।

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