जयपुर। अजमेर रोड क्वींस कॉलोनी नीलकंठ कॉलोनी स्थित श्री सरस निकुंज की पीठ बरसाना में एक जनवरी से हो रही श्रीराम कथा में गुरुवार को श्री शुक सम्प्रदाय पीठाधीश अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में व्यास पीठ पर आचार्य डॉ. राजेश्वर ने भगवान राम का शबरी की कुटिया पर पधारना, श्रीराम-हनुमान मिलन, श्रीराम- सुग्रीव मित्रता, लंका दहन सहित अनेक प्रसंगों का श्रवण कराया।
छोटे दादा गुरुदेव शुक सम्प्रदाय पीठाधीश रसिक माधुरी शरण महाराज की 127वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कथा में गुरुवार को त्रिवेणी पीठाधीश्वर रामरिछपालदास जी महाराज सहित अनेक संत-महंतों ने सानिध्य प्रदान किया। श्री शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज, श्री सरस परिकर के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया ने सभी का सम्मान किया।
कथा प्रसंग का विस्तार करते हुए आचार्य राजेश्वर ने कहा कि भगवान कभी भी अपने भक्त के समर्पण और विश्वास को व्यर्थ नहीं जाने देते। क्योंकि भगवान भक्ति के वश में है और हम अपनी भक्ति से ही ईश्वरीय कृपा को प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि शबरी, सुग्रीव, सुतीक्ष्ण जैसे भक्तों की प्रतीक्षा इस बात को सिद्ध करती है कि देर सवेर ईश्वर भक्त की सुध अवश्य लेते हैं और कृतार्थ करते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने अभिमान को छोडक़र प्रभु की शरणागति प्राप्त करें।
उन्होंने कहा कि श्रीराम-शबरी की भेंट भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में कोई साधारण मिलन नहीं है। एक भक्त का अपने भगवान के प्रति अटूट विश्वास और आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक है। आचार्य राजेश्वर ने कहा कि यह भक्ति के नौ रसों का घाट है जिसे स्वयं प्रभु श्रीराम ने अपने श्रीमुख से नवधा भक्ति नाम दिया है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस के अरण्यकांड में स्वयं प्रभु श्रीराम के मुखारबिंद से नवधा भक्ति के विषय में विस्तार से बताया है।
श्रीराम-शबरी मिलन सभी तरह की ऊंच-नीच से परे यह मिलन सहस्त्रों शताब्दियों से भक्त और भगवान के विश्वास का प्रमाणिक उदाहरण रहा है। श्रीराम जब शबरीजी के आश्रम में आए तो शबरी मुनि मतंग के वचनों का स्मरण कर मन में प्रफुल्लित हो गई। उनके जीवन का लक्ष्य उन्हें प्राप्त हो गया। प्रसंग के अनुरूप सभी श्रोतागणों को बेर का प्रसाद वितरित किया गया। कथा का विश्राम नौ जनवरी को राम राज्याभिषेक के साथ होगा।
गंगा माता मंदिर भागवत कथा में हुआ कृष्ण जन्म:
स्टेशन रोड स्थित श्री गंगा माता मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में गुरुवार को राम जन्म और कृष्ण जन्म के बाद नंदोत्सव मनाया गया। मंदिर प्रांगण नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की… के जयघोष से गूंज उठा। वातावरण ऐसा प्रतीत हुआ मानो ब्रज की गलियां सजी हों और साक्षात नंदगांव में श्रीकृष्ण जन्म का उत्सव मनाया जा रहा हो।
कथा वाचक आशीष व्यास शास्त्री ने अपनी संगीतमय वाणी में श्रीकृष्ण जन्म के दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा जब-जब धरती पर अधर्म का भार बढ़ा, तब-तब भगवान ने भक्तों की रक्षा के लिए अवतार लिया।
जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म का वर्णन हुआ तो शंख-घडिय़ाल, मृदंग और करताल की ध्वनि के बीच श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। लाला के जन्म की हो बधाई हो… नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की…, कान्हा जन्म सुन आई यशोदा मैया दे दो बधाई…जैसे भजनों की पंक्तियां गूंज उठीं। कपड़े, सूखे मेवे, फल, मिठाइयां, खिलौने और टॉफियों की जमकर उछाल हुई।




















