श्री गोविन्द देव जी के दरबार में श्रीमद्भागवत कथा

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जयपुर। श्री निंबार्क तीर्थ किशनगढ़ के पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित जगतगुरु श्री निंबार्काचार्य श्री श्रीजी महाराज श्री श्याम शरण देवाचार्य जी ने रविवार को भागवत कथा के दूसरे दिन कहा कि परमात्मा से बढ़कर कोई और सुख एवं संपदा नहीं है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा श्रवण करने वालों का सदैव कल्याण होता है।

महाराज ने कहा कि नारद जी ने देखा अज्ञान रूपी अंधकार से दुखी है,सारा संसार इस अज्ञान को दूर करने के लिए ही श्रीमद्भागवत महापुराण है। उन्होंने हरि की व्यापकता का वर्णन किया गया। कथा व्यास ने भागवत के रहस्यमय प्रसंगों का उद्घाटन करते हुए कहा कि वृंदा का अर्थ है जहां के लोग हिंसक नहीं हो, भागवत महात्म्य का प्रसंग आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि भागवत ही भगवान है। भागवत भगवान् का अक्षरावतार है।

वक्ता व श्रोता के धर्म को विवेचना करते हुए बताया कि वक्ता का चरित्र स्वच्छ होना चाहिए,वहीं श्रोता भगवान् के प्रति समर्पित होना चाहिए। वक्ता प्रेरणा का पुंज होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान जीव का उद्धार करते हैं।भक्ति, ज्ञान और वैराग्य तीनों हमारे जीवन में होना चाहिए।

निम्बार्काचार्य ने कहा कि श्रीमद्भागवत् के प्रारंभ में सत्य की वन्दना की गई है,क्योंकि सत्य व्यापक होता है सत्य सर्वत्र होता है और सत्य की चाह सबको होती है। पिता अपने पुत्र से सत्य बोलने की अपेक्षा रखता है भाई भाई से सत्य पर चलने की चेष्टा करता है मित्र मित्र से सत्यता निभाने की कामना रखता है यहां तक की चोरी करने वाले चोर भी आपस में सत्यता बरतने की अपेक्षा रखते है, इसलिए प्रारंभ में श्रीवेदव्यास जी ने सत्य की वंदना से मंगलाचरण किया और भागवत कथा का विश्राम ही सत्य की वन्दना से किया, क्योंकि सत्य ही कृष्ण है सत्य ही प्रभु श्रीराम है सत्य ही शिव एवं सत्य ही मां दुर्गा है अतः कथा श्रवण करने वाला सत्य को अपनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि श्रीमद्भागवत में निष्कपट धर्म का वर्णन किया गया है जो व्यक्ति निष्कपट हो, निर्मत्सर हो उसी व्यक्ति की कथा कहने एवं कथा श्रवण करने का अधिकार है।

कथा आयोजक ब्रजकिशोर ‘बिरजू‘ गोयल ने बताया कि सोमवार को महाराजश्री ध्रुव और प्रहलाद चरित्र की कथा सुनाएंगे। महोत्सव के तहत 19 दिसंबर को श्री राम अवतार, श्री कृष्ण जन्म एवं नंद उत्सव का आयोजन होगा। 20 दिसंबर को श्री कृष्ण बाल लीला एवं श्री गिरिराज पूजन का भक्तजन आनंद उठाएंगे 21 दिसंबर को महारास एवं रुक्मणी मंगल कथा सुनाई जाएगी। 22 दिसंबर को महारास के साथ श्री कृष्ण- सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष की कथा होगी। इसी दिन कथा की पूर्णाहुति होगी।

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