जयपुर। श्री गिर्राज संघ परिवार विश्वकर्मा,जयपुर के 27 वें वार्षिकोत्सव पर 108 श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समारोह का शुभारंभ शुक्रवार को विद्याधर नगर सेक्टर 7 स्थित शिव मंदिर से निकली 201 महिलाओं की कलश व पोथी यात्रा से हुआ। इस दौरान आसपास का क्षेत्र भक्ति और आस्था के रंग में सराबोर नजर आया। श्री गिर्राज संघ परिवार विश्वकर्मा के अध्यक्ष राम रतन अग्रवाल व महामंत्री गिरीश अग्रवाल ने बताया कि कथा के पहले दिन को शुक्रवार को विद्याधर नगर सेक्टर-7 स्थित शिव मंदिर से कलश यात्रा निकाली गई।
बैंड बाजे के साथ निकलने वाली इस कलश यात्रा में 201 महिलाएं सिर पर मांगलिक कलश लेकर चल रही थी, वहीं पुरुष श्रद्धालु सिर पर भागवत पोथी लेकर व भागवत का मूल पाठ करने वाले 125 ब्राह्मण कलश यात्रा में भगवा वस्त्र धारण कर चल रहे थे। इस दौरान श्रद्धालु बोलो श्याम प्रभु की बोलो…गोविन्द बोलो,जय गोपाल बोलो….जैसे भजनों की स्वर-लहरियों पर नाच-गाकर वातावरण को भक्तिमय बना रहे थे। यह कलश यात्रा जिन-जिन मार्गों से गुजरी,वे सभी मार्ग भक्ति और आस्था के रंग में भीगे नजर आए।
इस दौरान कलशयात्रा में भगवान श्रीकृष्ण की सजीव झांकी सभी के बीच आकर्षण का केन्द्र रही। इस दौरान कलश शोभायात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। कलष यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई कथा स्थल विद्याधर नगर,सेक्टर-7 स्थित अग्रसेन हॉस्पीटल के पीछे पहुंची, जहां पर आयोजकों ने श्रीमद भागवत की पूजा की। इस अवसर पर विश्व विख्यात कथा व्यास भागवत रत्न आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज, वृंदावन धाम ने कथा में कहा कि विद्याधर नगर आज से वृंदावन धाम बन गया है। यहां सात दिन भक्ति रस की अविरल धारा बहेगी।
श्रीमद्भागवत कथा के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि ’भागवत जी’ भगवान श्री कृष्ण जी का ही वांग्मय अर्थात शब्द रूप हैं। भागवत जी हमें भक्ति, ज्ञान और त्याग की शिक्षा देती हैं। भागवत शब्द में ’भ’ शब्द भवसागर रूपी जीवन में हमें प्रकाश देता है। ’ग’ शब्द जीवन में हमें गति प्रदान करता है । ’व’ शब्द यह बताता है कि श्रीमद्भागवत सभी पुराणों में वरिष्ठतम है एवं ’त’ शब्द यह बताता है कि जो भागवत की शरण में आता है वह संसार से तर जाता है।
श्रीमद्भागवत और श्रीमद् गीता के अंतर की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि दोनों में बहुत अंतर है। श्री मद्भागवत स्वयं साक्षात् श्रीकृष्ण भगवान हैं तथा श्रीमद् गीता भगवान श्री कृष्ण के श्रीमुख से निकली हुई उनकी वाणी है। श्रीमद् गीता योग शास्त्र है, रामायण प्रयोग शास्त्र है तथा श्रीमद् भागवत वियोग शास्त्र है। जिसने संसार में जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है। परंतु श्रीमद् भागवत कथा के श्रृवण मात्र से प्राणी इस संसार रूपी भवसागर से तर जाता है और संसार में आवागमन अर्थात जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है।
भागवत ऐसा ग्रंथ है जिसमें रस ही रस है, इसमें कहीं भी गुठली का तो नामोनिशान ही नहीं है। महाराज श्री ने कहा कि श्री बिहारी जी महाराज को केवल दो चीजें अच्छी लगती हैं – एक तो उनको चंदन और दूसरा वंदन। जो भी भगवान को को चंदन और वंदन प्रदान करते हैं उनके जीवन के समस्त बंधन कट जाते हैं।महाराज श्री के श्रीमुख से कथा रस और मधुर भजनों को सुनकर श्रोतागण झूम उठे और मंत्रमुग्ध होकर नृत्य करने लगे।
संयोजक विनोद गोयल ने बताया कि महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को नारद व्यास संवाद,पांडव चरित्र व शुकदेव आगमन की कथा सुनाएंगे। उन्होंने बताया कि महोत्सव के तहत 11 को कपिल देवहुति संवाद व ध्रुव चरित्र की कथा के बाद 12 को प्रह्लाद चरित्र व वामन अवतार की कथा के बांद श्रीकृष्ण जन्म की कथा के साथ नंदोत्सव मनाया जाएगा। महोत्सव के तहत 13 को श्री कृष्ण बाल लीला,माखन चोरी व गिरिराज पूजन महोत्सव मनाया जाएगा। इसी कड़ी में 14 को महारास कथा,मथुरा गमन व रूकमणि विवाह महोत्सव मनाया जाएगा। इसी कड़ी में अंतिम दिन 15 जनवरी को सुदामा चरित्र व नवयोगेश्वर संवाद व परीक्षित मोक्ष की कथा के साथ पूर्णाहुति होगी।



















