जयपुर। वेदांता द्वारा प्रस्तुत जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के तीसरे दिन कहानियों और संस्कृतियों का सुंदर संगम देखने को मिला। साहित्य और समकालीन समाज पर चिंतन से लेकर भोजन तक, कथा-साहित्य और संघर्ष जैसे विषयों पर संवादों तक। इस दिन ने होटल क्लार्क्स आमेर, जयपुर में दर्शकों को विचार और लेखन की एक भरपूर झलक देखने को मिली। किताबों और विचारों के दुनिया के सबसे बड़े आयोजन ने बड़ी संख्या में दर्शकों को आकर्षित किया।
तीसरे दिन की शुरुआत मॉर्निंग म्यूजिक से हुई। जहाँ ताल फ़्राय की तालवाद्य प्रस्तुति ने कर्नाटक और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को एक साथ पिरोते हुए एक अद्भुत माहौल बना दिया। द मैजिक ऑफ़ द लॉस्ट इयररिंग्स सत्र में सुधा मूर्ति ने मंदिरा नायर के साथ बातचीत में पुस्तक के लिए किए गए शोध के बारे में बताया। उन्होंने अपने परिवार से मिली प्रेरणा और विभाजन की कहानी को अपने पोते-पोतियों तक शिक्षा के माध्यम से पहुँचाने की इच्छा जताई।
सुधा मूर्ति ने कहा, “हम बच्चों को अतीत का महत्व नहीं बताते। मेरा हमेशा से मानना है कि अगर आप अपने इतिहास को नहीं जानते, तो आप अपने भविष्य को भी नहीं जान पाएँगे। इतिहास और भविष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।” यू कैन हैव इट ऑल: अनलॉक द सीक्रेट्स टू अ ग्रेट लाइफ़ सत्र में गौर गोपाल दास ने पौलोमी चटर्जी के साथ संवाद में दर्शकों को अपनी जीवन-कथा की शक्ति पहचानने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि अपनी कहानी को समझने से व्यक्ति अपनी कमजोरियों को पहचान सकता है और अपने भीतर बेहतर समझ विकसित कर सकता है।
एक अन्य प्रभावशाली सत्र द चोला टाइगर्स
एवेंजर्स ऑफ़ सोमनाथ में लेखक अमीश ने विवेका कुमारी के साथ बातचीत में अपने नवीनतम उपन्यास और उसमें निहित गहरे ऐतिहासिक और नैतिक विषयों पर चर्चा की। अपने उपनाम को छोड़ने के निर्णय पर बोलते हुए उन्होंने जाति व्यवस्था की आलोचना की और इसे एक दमनकारी संरचना बताया। बाबासाहेब आंबेडकर के आदर्शों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जाति व्यवस्था भारत की प्रगति में एक स्थायी बाधा रही है।
द गाज़ा जेनोसाइड सत्र में एवी श्लाइम, नोआ अविशाग श्नाल, रमिता नवाई और लीना ख़लाफ़ तुफ़्फ़ाहा ने नवदीप सूरी के साथ बातचीत में फिलिस्तीन में जारी संकट पर चर्चा की। इज़राइली-ब्रिटिश इतिहासकार एवी श्लाइम ने संघर्ष के नरसंहार में बदल जाने पर बात करते हुए वेस्ट बैंक में मानवीय सहायता से इनकार की ओर ध्यान दिलाया। कवि और लेखिका लीना ख़लाफ़ तुफ़्फ़ाहा ने अपनी कविता रनिंग ऑर्डर का पाठ किया, जिसमें बमबारी से पहले केवल 58 सेकंड में घर खाली करने की भयावह स्थिति को दर्शाया गया। पत्रकार नोआ अविशाग श्नाल और रमिता नवाई ने गाजा से की गई अपनी रिपोर्टिंग साझा करते हुए कब्जे में जीवन और सुर्ख़ियों के पीछे छिपी मानवीय कहानियों को सामने रखा।
इस दिन द विजडम ऑफ़ इंडियन फ़ूड सत्र में रुजुता दिवेकर और नमिता देविदयाल के बीच संवाद हुआ। दिवेकर ने भारतीय खानपान की जड़ों की ओर लौटकर जीवनशैली में बदलाव लाने की बात कही। उन्होंने ताज़ा पकाए गए भोजन, स्वस्थ आदतों को जल्दी वजन घटाने से अधिक महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “हम केवल वही नहीं हैं जो हम खाते हैं। मेरा यह भी मानना है कि हम सिर्फ़ अपनी थाली के भोजन से नहीं, बल्कि उसे खाने के हमारे दृष्टिकोण और उसे अपनाने की समझ से भी बनते हैं।
भोजन पर आधारित सत्रों की कड़ी में अम्मीज़ किचन
हेयर लूम रेसिपीज फ्रॉम रामपुर में पर्निया कुरैशी ने तराना हुसैन खान के साथ बातचीत में भोजन, स्मृति और विरासत की एक भावनात्मक यात्रा कराई। रामपुर की रियासत से जुड़ा यह सत्र फारसी प्रभावों और 1857 में मुगलों के पतन के बाद कलाकारों के प्रवासन से बनी समृद्ध पाक परंपरा को दर्शाता है। रामपुर का भोजन मुगलई, अवधी और कश्मीरी स्वादों का अनूठा संगम है, जिसमें धीमी आँच, संतुलन और सूक्ष्मता की झलक मिलती है।




















