हवन-यज्ञ के साथ संपन्न हुई सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा

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जयपुर। बजाज नगर स्थित एजी कॉलोनी फुटबॉल ग्राउंड पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का रविवार को आध्यात्मिक वातावरण में हवन के साथ समापन हुआ। कथा समापन अवसर पर श्रद्धालुओं की बड़ी उपस्थिति रही और पूरा परिसर भक्ति, श्रद्धा एवं वैराग्य के भाव से सराबोर नजर आया।

श्रीमद् भागवत कथा में श्रीधाम वृंदावन से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक पं. हरिओम शरण शास्त्री ने अंतिम दिवस सुदामा चरित्र, नव योगेश्वर संवाद, कलियुग वर्णन एवं परीक्षित मोक्ष प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम ही इस संसार में सबसे बड़ा सहारा है। नाम स्मरण से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मानव को मोक्ष मार्ग की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि मृत्यु अटल, शाश्वत और निश्चित है, इसलिए मृत्यु का भय नहीं करना चाहिए। श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य को आदर्श जीवन के साथ-साथ आदर्श मृत्यु का भी मार्ग दिखाती है।

कथावाचक ने कहा कि श्रीमद् भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यह भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी से मानव को जोड़कर उसके जीवन को सन्मार्ग पर ले जाती है। भागवत श्रवण से मन की शुद्धि होती है और व्यक्ति सकारात्मक, संयमित एवं संतुलित जीवन की ओर अग्रसर होता है।कथा समापन अवसर पर विधिवत हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें यज्ञ भगवान को आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण की कामना की गई।

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