विजया एकादशी स्पेशल: शहर में राधा गोविंद मंदिरों में सजेगी झांकियां

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Vijaya Ekadashi Special
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जयपुर। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर विजया एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और पीली चीजों का दान करना शुभ होता है। इससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती हैं।

ज्योतिषाचार्य श्रीकृष्ण चंद्र शर्मा ने बताया कि विजया एकादशी का व्रत को शास्त्रों में सर्वोत्तम माना गया है। क्योंकि, यह इकलौता ऐसा व्रत है जिसका पुण्य दूसरे व्यक्ति को भी दान कर सकते हैं। साथ ही इस व्रत को करने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। एकादशी का व्रत 13 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा।

मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है। इस व्रत को करने और भगवान के मंत्रों का जप करने से जीवन में आ रही कठिनाइयां दूर होती हैं। साथ ही सफलता का रास्ता आसान हो जाता है। वही एकादशी का व्रत करने वालों को शत्रुओं पर सफलता प्राप्त होती है। साथ ही तरक्की में आ रही बाधाएं भी दूर होती है।

साल भर में पड़ने वाली 24 एकादशी तिथि में विजया एकादशी का व्रत का अत्यधिक महत्व इसलिए माना गया है, क्योंकि इस व्रत को भगवान श्री राम ने लंका विजय से पहले किया था। मान्यता है कि इस व्रत को करने साधक के जीवन से जुड़े सभी रोग-शोक दूर होते हैं और वह अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है। विजया एकादशी व्रत के पुण्य प्रभाव से व्यक्ति को कोर्ट-कचहरी के मामले में जीत हासिल होती है।

शर्मा के अनुसार जब भी एकादशी तिथि सूर्योदय के समय लगती है तब विजया एकादशी का व्रत किया जाता है। इसलिए विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को ही करना शास्त्र सम्मत बताया गया है। इस मौके पर शहर के राधा गोविंद देव जी मंदिर सहित सभी जगह विशेष भजन संध्या का आयोजन होगा। भगवान की विशेष झांकियां सजाई जाएगी।

ज्योतिषाचार्या ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत भगवान राम ने भी किया था। जब भगवान राम लंका के रास्ते पर थे उस समय समुद्र के तट पर अपनी सेना के साथ मिलकर भगवान राम ने विजया एकादशी का व्रत किया था। तभी से इस एकादशी का नाम विजया एकादशी पड़ा। इस दिन जातक सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें और की प्रतिमा स्थापित करें।

इसके बाद सबसे पहले भगवान विष्णु को चंदन लगाएं और वस्त्र अर्पित करें। अब भगवान को पीले रंग की चीजों का भोग लगाएं उन्हें पीली मिठाई और गुड़ चने का भोग लगाए। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए उनके मंत्रों का जप करें। विजया एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और फिर आरती करने के बाद अंत में सभी को प्रसाद वितरित करें।

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