एटीएम फ्रॉड का वांछित इनामी आरोपी नूंह से गिरफ्तार

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Wanted ATM fraud accused carrying a reward arrested from Nuh.
Wanted ATM fraud accused carrying a reward arrested from Nuh.

जयपुर। राजधानी में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत लाल कोठी थाना पुलिस ने एटीएम धोखाधड़ी के मामले में 5 हजार रुपए के इनामी आरोपी को हरियाणा के नूंह जिले से गिरफ्तार किया है, जबकि जयपुर कमिश्नरेट की स्पेशल चाणक्य टीम (सीएसटी) ने 15 वर्षों से फरार चल रहे दो हार्डकोर इनामी बदमाशों को उत्तर प्रदेश सीमा क्षेत्र से दबोच लिया।

पुलिस उपायुक्त जयपुर पूर्व रंजिता शर्मा ने बताया कि लाल कोठी थाना पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपी मौसिम खान (25), निवासी भादस, जिला नूंह (हरियाणा) है, जो जयपुर के सिंधी कैंप और विद्याधर नगर थानों में दर्ज एटीएम फ्रॉड मामलों में वांछित था। डीसीपी ईस्ट ने बताया कि वर्ष 2021 में भारतीय स्टेट बैंक की सांगानेरी गेट स्थित विशेष शाखा के एटीएम में करीब 1.10 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था।

जांच में सामने आया कि आरोपी ने एटीएम मशीन के शटर को रोककर राशि जमा प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न की और तकनीकी एरर का फायदा उठाकर रुपए निकाल लिए, जिससे सिस्टम में गड़बड़ी के चलते राशि वापस खातों में जमा हो गई। इस तरह आरोपी ने एक ही राशि का दोहरा लाभ लेकर बैंक से धोखाधड़ी की।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि मौसिम खान एटीएम और बैंक शाखाओं के बाहर ग्राहकों पर नजर रखता था और मौका पाकर लोगों को झांसे में लेकर उनके एटीएम कार्ड बदलकर खातों से रुपए निकाल लेता था। आरोपी के खिलाफ राजस्थान और हरियाणा में धोखाधड़ी, चोरी और मारपीट सहित कई गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है तथा उसके अन्य साथियों की तलाश जारी है।

इसी बीच जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की स्पेशल चाणक्य टीम (सीएसटी) और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 15 वर्षों से फरार चल रहे दो हार्डकोर इनामी बदमाशों को गिरफ्तार किया है। पुलिस उपायुक्त के निर्देशन में चलाए गए इस अभियान में तकनीकी निगरानी और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों को उत्तर प्रदेश सीमा से दस्तयाब किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों में राजेश कुमार उर्फ राजा (निवासी उचैन, भरतपुर) और सतीश चंद उर्फ सोनू (निवासी रूपवास, भरतपुर) शामिल हैं। दोनों पर लूट, डकैती और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामलों में इनाम घोषित था और वे वर्ष 2011 से फरार चल रहे थे।
दोनों आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए पहचान बदलकर उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में मजदूरी कर रहे थे और मोबाइल नंबर बदलकर लगातार ठिकाने बदलते रहे। हाल ही में मिली पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस ने सादा वर्दी में घेराबंदी कर दोनों को पकड़ लिया।

पुलिस अब दोनों मामलों में विस्तृत पूछताछ कर रही है, ताकि इनके अन्य सहयोगियों और लंबित आपराधिक वारदातों का भी खुलासा किया जा सके।

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