जयपुर। अजमेर रोड स्थित ठिकरिया में विश्वविख्यात परम संत उज्जैन वाले बाबा उमाकांत महाराज द्वारा आयोजित तीन दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव का जयपुर में भव्य समापन हुआ। विगत तीन दिनों से बाबा उमाकांत महाराज द्वारा भक्तों को शाकाहारी, सदाचारी, नशामुक्त बनने की सीख के अलावा पूज्य महाराज द्वारा भक्तों को मनुष्य शरीर की उपयोगिता समझाते हुए जीते जी ईश्वर के दर्शन कराने वाले गुरु मंत्र (नामदान) दिया।
कार्यक्रम के अंतिम दिन महाराज ने आत्म कल्याण और गुरु भक्ति के साथ वहां मौजूद मिडिया के माध्यम से भारत देश की जनता से ये अपील प्रार्थना करी की देशभक्ति बड़ी चीज है आंदोलन, हिंसा, धरना, घेराव से देश की सम्पत्ति का नुकसान होता है। इसलिए लोग इनसे दूर रहें, देश की सम्पत्ति आपकी अपनी सम्पत्ति है इसलिए शाकाहारी, सदाचारी, नशामुक्त बनकर देश की रक्षा करें, देश की वस्तुओं की सुरक्षा करें। नियम-कानून का पालन करे। बड़े बुजुर्गों का सम्मान और माता पिता की सेवा करें।
आतंकवाद ,नक्सलवाद , भाषावाद ,क्षेत्रवाद के बजाए एक मानव वाद ले आओ
महाराज ने सतसंग में भक्तों से आह्वान किया की किसी व्यक्ति की, समाज की की, राजनेता की, अधिकारी की, धर्म की निंदा बुराई मत करो। कर्मचारियों, अधिकारीयों का सम्मान करो, देश में बनाये गए आदेशों और नियमों का पालन करों। ये नक्सल वाद, आतंक वाद, क्षेत्रवाल, भाई भतीजा वाद, जाती वाद, कौम वाद ये जितने भी वाद है इन सबकों खत्म कर एक मानव वाद ले आया जाये। तो सारी समस्याओं का समाधान हो जाए। सब में उस ईश्वर का अंश है, इसलिए सभी से प्रेम करे। अपने दिल में सभी के लिए प्रेम की जगह बनाओ।
मांसाहार और शराब, एवं नशे को त्यागने का संकल्प
महाराज ने भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा की मांस मनुष्य का भोजन नहीं है और जीव हत्या तो सबसे बड़ा पाप है इसलिए आप सभी लोग हमेशा शाकाहारी रहना, जीवो पर दया करना। महाराज ने ये भी कहा की मांस और शराब के पैसे से कोई देश तरक्की नहीं कर सकता। इसलिए हमेशा शाकाहारी और नशामुक्त रहना। ऐसा कोई नशा मत करना जिससे बुद्धि पागल हो जाये और माँ, बहन, बेटी की पहचान ख़त्म हो जाए। इसके लिए महाराज द्वारा नामदान देने से पहले सभी लोगों को सदा शाकाहारी,नशामुक्त रहने और अंडा,मांस, मछली,मुर्गा, शराब और अन्य व्यसनों से सदा दूर रहने का संकल्प दिलाया गया।
भारत के साथ कई देशों से आये भक्तगण
जयपुर में आयोजित इस गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम में बाबा उमाकांत महाराज के दर्शन करने, सतसंग सुनने और नामदान लेने के लिए भारत के सभी राज्यों के अलावा नेपाल, अमेरिका, स्पेन, श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापूर, क़तर, दुबई समेत अनेक देशों से श्रद्धालुओं का आश्रम में आगमन हुआ। तेज गर्मी और उमस के बावजूद महाराज की भक्तों का उत्साह देखते बनता था। इन सभी भक्तों के लिए बाबा जयगुरुदेव जयपुर संगत के सेवादार तन,मन और धन से समर्पित रहे। व्यवस्था में बाधा ना आये इसलिए सुरक्षा, पार्किंग, खोयापाया और चिकित्सा जैसे विभाग पूर्ण मुस्तैदी के साथ तीन दिन लगे रहें।
कुल मिलकर महाराज के सानिध्य में आये भक्तों के जन सैलाब ने तीन दिनों तक गुरु दया का अनुभव कर उनका आशीर्वाद लेकर अपनी गुरु पूर्णिमा को गुरु भक्ति से सराबोर कर दिया।




















