राजस्थान परिवहन विभाग की ओवरलोडिंग वाहनों के लिए सख्त कार्यवाही

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Rajasthan Transport Department takes strict action against overloaded vehicles
Rajasthan Transport Department takes strict action against overloaded vehicles

जयपुर। राजस्थान परिवहन विभाग ने कोटपुती,बहरोड,नीमकाथाना व पाटन जैसे खनन क्षेत्रों से दिल्ली की ओर से भारी मात्रा में अवैध पत्थर व निर्माण सामग्री की ढुलाई के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए चार टीमों ने तीन सप्ताह में 100 से अधिक वाहन जब्त कर करीब 1 करोड़ रुपए का रेवन्यू एकत्रित किया है।

परिवहन आयुक्त सुची त्यागी ने बताया कि कोटपुतली,बहरोड़,नीमकाथाना व पाटन जैसे खनन इलाकों में दिल्ली की ओर से भारी मात्रा में अवैध ओवरलोडिंग वाहन से पत्थर और निर्माण सामग्री की ढुलाई काफी लंबे समय से जारी थी। परिवहन विभाग के उड़नदस्तों ने कई बार प्रयास कर इस अवैध लोडिंग को रोकने का प्रयास किया। लेकिन जब भी ओवरलोडिंग वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जाता था तो अवैध लोडिंग वाहनों के चालक उन्हे रास्ते में ही रोक कर खड़े हो जाते और टीम के जाते ही फिर से ढुलाई शुरु कर देते।

लेकिन इस बार परिवहन आयुक्त सुची त्यागी स्पष्ट निर्देश पर कोटपुतली-बहरोड़ जिला कलेक्टर व एसपी राजन दुश्यंत के सहयोग से तीन सप्ताह से विशेष सघन प्रवर्तन अभियान चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व जिला परिवहन अधिकारियों अतुल शर्मा,संजय शर्मा,यशपाल यादव,सुनील सैनी और अनुप कुमार सहारिया ने किया।

ये रहा अभियान का असर

विशेष सघन प्रवर्तन अभियान में तीन सप्ताह में कुल चार टीमें 24 घंटे हाईवे पर तैनात रहीं और जीपीएस मैकेनिक, टायर मैकेनिक व ड्राइवर और अन्य तकनीकी स्टापु की सहायता से 100 से अधिक ओवरलोडिंग वाहनों को जब्त किया। जिन वाहनों में बॉडी एक्सटेंशन कर ओवरलोड किया जा रहा था उनकी बॉडी को मौके पर ही कटवाया गया। वाहन छोड़ने से पहले यह सुनिश्चित किया गया कि वाहन अब लोडिंग मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।

इसी के साथ न्यायालय विधिक कार्रवाही भी की गई। इस सघन अभियान के चलते क्षेत्र में ओवरलोडिंग लगभग शून्य हो गई है। अब खुद वाहन मालिक अपने वाहनों की बॉडी कटवा रहे हैं, और मानकों के अनुसार ही माल ढुलाई कर रहे हैं। जिला परिवहन कार्यालय में इन कार्रवाही के वीडियो साक्ष्य संकलित किए गए हैं, जिन्हें डीटीओ सुनील सैनी के माध्यम से प्रसारित किया जाएगा, ताकि यह दिखाया जा सके कि जब प्रशासन ठान ले, तो कोई भी व्यवस्था सुधार से दूर नहीं।

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