स्वदेशी और समरसता से ही सशक्त होगा समाज: निम्बाराम

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Society will be empowered only through Swadeshi and harmony: Nimbaram
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जयपुर। बजाज नगर में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन उत्साह और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक निम्बाराम तथा गलता पीठ के स्वामी राघवेंद्र आचार्य का सानिध्य प्राप्त हुआ।

स्वामी राघवेंद्र आचार्य ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखते हैं। भारत की प्राचीन सभ्यता, वर्ण व्यवस्था की मूल भावना और सामाजिक समरसता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि समाज को विभाजन से बचाकर एकता की दिशा में आगे बढ़ना आवश्यक है।

मुख्य वक्ता निम्बाराम ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह आयोजन केवल जयपुर ही नहीं, बल्कि पूरे देश में आयोजित हो रहे हैं। 14 फरवरी को पुलवामा में शहीद हुए वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने राष्ट्र के प्रति कर्तव्य बोध का संदेश दिया। उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया—राष्ट्र प्रथम की भावना, हिंदू समाज की एकता, स्वदेशी का उपयोग, पर्यावरण संरक्षण (सिंगल यूज़ प्लास्टिक का त्याग), नागरिक कर्तव्यों का पालन तथा सामाजिक समरसता को व्यवहार में उतारना।

उन्होंने कहा कि सनातन का अर्थ है जो कभी समाप्त नहीं होता। विविधता में एकता ही हिंदू समाज की विशेषता है। परिवारों में संस्कार, परंपरा और नियमित पारिवारिक संवाद आवश्यक हैं। स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग, भोजन की बर्बादी रोकना, समाज के वंचित वर्गों को जोड़ना तथा राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति आस्था रखना समय की आवश्यकता है।

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