जवाहर कला केन्द्र में लोक संस्कृति का अनूठा समागम

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जयपुर। जयपुर के सांस्कृतिक केंद्र जवाहर कला केन्द्र के ‘शिल्प ग्राम’ में आज राजस्थान की सतरंगी लोक संस्कृति जीवंत हो उठी। कला एवं साहित्य को समर्पित संस्था ‘अखिल भारतीय संस्कार भारती’ तथा राजस्थान पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय उत्सव ‘लोक रंग से उजास: कला संगम-2026’ का शुक्रवार को रंगारंग आगाज हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ कलाकारों के समवेत स्वर और वंदना के साथ हुआ। पहले ही दिन प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों ने अपनी ऊर्जावान प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हण्डु पहलवान एवं जगत सिंह सुंदरावली ने गौ-महिमा और कृष्ण भजनों के माध्यम से आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया।

डीग के विष्णु शर्मा के दल ने फूलों की होली और चरकुला नृत्य से ब्रज की फाल्गुनी छटा बिखेरी। वहीं, श्री कृष्ण गुर्जर एंड पार्टी (महुआ) के लांगुरिया और जगत सिंह के ‘बम रसिया’ ने दर्शकों में उत्साह भर दिया।
गफरूद्दीन द्वारा भपंग वादन, तेज सिंह इसरोली के दल की ‘भजन जिकड़ी’ और मयूर नृत्य ने राजस्थान की विविध कला परंपराओं का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन रेणु श्रीवास्तव और सोहनपाल शर्मा ने किया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ ‘लोक चौपाल’ के माध्यम से बौद्धिक विमर्श का आयोजन भी किया गया, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी को लोक जीवन की वैज्ञानिकता से जोड़ना रहा। मुख्य संयोजक निधीश गोयल ने ‘लोक’ और ‘Folk’ के बीच के सूक्ष्म दार्शनिक अंतर को स्पष्ट किया।

प्रथम सत्र में डॉ. इंदु शेखर ‘तत्पुरुष’, डॉ. विवेक भटनागर एवं डॉ. तनुजा सिंह ने भारतीय लोक दृष्टि पर विचार साझा किए। द्वितीय सत्र में नारायण सिंह राठौड़ ‘पीथल’, डॉ. गीता सामोर एवं तनेराज सिंह सोढ़ा ने लोक परंपराओं में निहित पर्यावरण संरक्षण, नारी विमर्श और जीवन प्रबंधन जैसे विषयों पर गहराई से मंथन किया।

यह उत्सव राजस्थान की कलात्मक विरासत और लोक जीवन के आदर्शों को सहेजने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। आगामी दो दिनों में यहाँ और भी कई विशिष्ट लोक कलाओं का प्रदर्शन किया जाएगा।

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