जयपुर में संविदा कार्मिकों का उग्र प्रदर्शन: नियमितीकरण की मांग तेज

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Violent protest by contract workers in Jaipur
Violent protest by contract workers in Jaipur

जयपुर। शिक्षा विभाग के संविदा कार्मिक—पंचायत शिक्षक और विद्यालय सहायक—राज्य बजट से निराश होकर मंगलवार को शहीद स्मारक पर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान कई कार्मिकों ने अर्ध-नग्न होकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई और शीघ्र नियमितीकरण की मांग उठाई।

प्रदर्शनकारी कार्मिकों का कहना है कि उन्हें इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं। पिछले बजट में माननीय उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने अनुभव में 2 वर्ष की छूट देकर नियमितीकरण का आश्वासन दिया था। लेकिन अनुभव अवधि पूर्ण होने के बावजूद अब तक नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से कार्मिकों में भारी आक्रोश है।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण जसरापुर ने बताया कि राजस्थान पंचायत शिक्षक विद्यालय सहायक संघ के आह्वान पर 23 हजार 740 संविदा कार्मिक लंबे समय से अल्प मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं। संविदा रूल्स 2022 के बिंदु संख्या 20 के तहत स्क्रीनिंग कर नियमितीकरण की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने की मांग की गई है।

प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ तथा प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल को जल्द मुख्यमंत्री स्तर तक मांगों को पहुचाने एवं वार्ता करवाने का आश्वासन दिया गया।

धरने को एकीकृत महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़, रामावतार ठेकला, विनोद शर्मा (जयपुर), रमेश दुआ (चूरू), संपत जाट (चित्तौड़), अमर दास वैष्णव, जितेंद्र मेहता, प्रमोद भिंडा ,केसुराम मेघवाल, शंकर राजपुरोहित, लता ओझा, पुरुषोत्तम शर्मा (करौली), राजवीर गुर्जर, दिनेश मीणा, भरत पटेल, मयंक शर्मा और चोलाराम परिहार सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सरकार ने नियमितीकरण की प्रक्रिया आरंभ नहीं की, तो शिक्षा विभाग में कार्यरत लगभग हजारों संविदा कार्मिक आंदोलन की राह पर उतरेंगे और आगामी पंचायत चुनावों का भी विरोध करेंगे।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति नियंत्रण में रही। कार्मिकों ने सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग दोहराई, ताकि वर्षों से लंबित नियमितीकरण का रास्ता साफ हो सके।

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