जयपुर। ढूंढाड़ की समृद्ध भक्ति परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक श्री प्रेमभाया महोत्सव का शुभारंभ शीतलाष्टमी के पावन अवसर पर चार दिवसीय भक्ति संगीत समारोह के साथ हुआ। चांदपोल बाजार स्थित जयलाल मुंशी का रास्ता के युगल कुटीर में श्री प्रेमभाया सरकार के पंचामृत अभिषेक के साथ समारोह का विधिवत श्रीगणेश किया गया।
वेद मंत्रोच्चार, शंखनाद और जयकारों के बीच श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में अभिषेक सम्पन्न हुआ। शाम को जयलाल मुंशी का रास्ता दीपावली की तरह रोशनी से जगमगा उठा। केसरिया पताकाओं से सजे मार्ग, भव्य पंडाल और खुले आसमान के नीचे भक्ति संगीत समारोह का शुभारंभ हुआ, जिसमें श्री प्रेमभाया सरकार का आकर्षक और दिव्य श्रृंगार किया गया।
भक्ति संगीत समारोह का मंगलाचरण दीपक शर्मा ने मोहे अपने चरण की शरण दे, जय गणपति गणराज… गणेश वंदना के साथ किया। इसके बाद कुमार गिर्राज ने घनश्याम म्हारा हिवड़ा में रम जाओ जी घनश्याम… प्रस्तुत कर भक्तितभाव का वातावरण बना दिया। गोपाल सैन ने नै पार लगाज्यो जी सांवरिया, म्हाने भूल बिसर मत जाज्यो… सुनाकर भक्त की भगवान से करुण पुकार को स्वर दिया।
गोपाल सिंह राठौड़ और पूजा राठौड़ ने म्हारी लैरां लाग्यों आवै छै यो मुरली हालों श्याम… भजन प्रस्तुत कर ठाकुरजी की भक्त वत्सलता का सुंदर चित्रण किया। वहीं हीना सैन ने गोवर्धन लियो रे उठाय नटवर नागरियो… सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
इसके साथ ही कार्तिकेय, केशव शर्मा सहित अन्य भजन प्रवाहकों ने भक्त युगलजी की भक्ति रचनाओं को अपनी मधुर आवाज में प्रस्तुत किया। लगभग आठ दशक पुरानी इस आध्यात्मिक परंपरा में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक ही जाजम पर बैठकर भक्ति सरिता में डुबकी लगाते नजर आए। विभिन्न मंदिरों के संत-महंतों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। दूधिया रोशनी के बीच भजन संध्या का दौर पूरी रात चलता रहा।
समिति अध्यक्ष दुर्गा चौधरी ने बताया कि गुरुवार को दिन में महिला मंडल की ओर से भजन-गायन होगा। जबकि रात्रि 8 बजे से संपूर्ण रात्रि भक्ति संगीत का आयोजन किया जाएगा।




















