पुलिस ने निभाया भाई का फर्ज: सफाईकर्मी की बेटियों की शादी में 1.61 लाख रुपये का ऐतिहासिक मायरा

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Historic dowry of Rs 1.61 lakh for the marriage of a sanitation worker's daughters
Historic dowry of Rs 1.61 lakh for the marriage of a sanitation worker's daughters

जयपुर। रिश्ते केवल खून से ही नहीं, बल्कि अपनापन और जिम्मेदारी से भी बनते हैं। इसका उदाहरण राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिला के नारायणपुर पुलिस थाने में देखने को मिला, जहां पुलिसकर्मियों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए एक सफाईकर्मी महिला की बेटियों की शादी में भाई बनकर मायरा (भात) भरा।

जानकारी के अनुसार वाल्मीकि मोहल्ला निवासी ललिता देवी पिछले करीब 40 वर्षों से नारायणपुर पुलिस थाना में सफाईकर्मी के रूप में सेवाएं दे रही हैं। लंबे समय से थाने से जुड़े होने के कारण पूरा स्टाफ उन्हें अपने परिवार का सदस्य मानता है।

11 मार्च 2026 को उनकी दो बेटियों अंजू और संजू की शादी तय हुई थी। ऐसे में एक बड़ी चिंता यह थी कि ललिता देवी का कोई भाई नहीं है, जो परंपरा के अनुसार मायरे की रस्म निभा सके। जैसे ही यह बात थाने के स्टाफ को पता चली तो पुलिस अधिकारियों और जवानों ने खुद भाई बनकर यह जिम्मेदारी निभाने का निर्णय लिया।

उपमहानिरीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक कोटपूतली-बहरोड़ देवेन्द्र विश्नोई के मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नाजिम अली खान के निर्देशन में वृत्ताधिकारी बानसूर मेधा गोयल और थानाधिकारी नारायणपुर रोहिताश मय समस्त जाब्ता ने खुद भाई की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। इसके बाद पुलिसकर्मी गाजे-बाजे के साथ ललिता देवी के घर पहुंचे और भाई का फर्ज निभाते हुए मायरा भरा।

पुलिसकर्मियों ने दोनों बेटियों के विवाह के लिए 1 लाख 61 हजार रुपए नकद, दो सिलाई मशीनें, दोनों बेटियों के लिए पांच-पांच जोड़ी कपड़े तथा परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी नए वस्त्र और आवश्यक सामग्री भेंट की।

जब पुलिस अधिकारी और जवान सिर पर साफा बांधकर मायरा लेकर पहुंचे तो ललिता देवी की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि थाना परिवार इस तरह उनकी खुशियों में शामिल होगा। पुलिस के इस मानवीय पहल की स्थानीय ग्रामीणों ने भी सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया।

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