दांडी मार्च की वर्षगांठ पर जयपुर में गहलोत के नेतृत्व में निकला मौन मार्च

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जयपुर। 12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए ऐतिहासिक दांडी मार्च की वर्षगांठ पर गुरुवार को राजधानी जयपुर में मौन पदयात्रा निकाली गई। भारत सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित इस पदयात्रा का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया।

सुबह करीब 8:30 बजे पदयात्रा शहीद स्मारक से शुरू होकर एमआई रोड, अजमेरी गेट और एसएमएस अस्पताल होते हुए सेंट्रल पार्क स्थित गांधी संग्रहालय तक पहुंची। करीब 4 किलोमीटर लंबे इस मौन पैदल मार्च में सैकड़ों गांधीवादी विचारकों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
पदयात्रा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, कांग्रेस विधायक रफीक खान और डूंगर राम गेदर सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी शामिल हुए। प्रतिभागी हाथों में दांडी मार्च और महात्मा गांधी के पोस्टर-बैनर लेकर चल रहे थे।

इस दौरान मीडिया से बातचीत में अशोक गहलोत ने कहा कि ब्रिटिश शासन ने भारतीयों पर अत्याचार किए थे और नमक पर टैक्स लगाया था। इसके विरोध में महात्मा गांधी ने अपने 78 साथियों के साथ दांडी यात्रा शुरू की, जो देखते ही देखते पूरे देश का जन आंदोलन बन गई। उन्होंने कहा कि आज भी देश में लोकतंत्र के सामने चुनौतियां हैं और ऐसे समय में गांधीजी के विचारों को याद करने की जरूरत है।

गहलोत ने देश में महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों का भी जिक्र किया। साथ ही उन्होंने फारूक अब्दुल्ला पर हुई फायरिंग की घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि इतने बड़े नेता पर पुलिस की मौजूदगी में हमला होना गंभीर बात है।

वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि महात्मा गांधी ने अहिंसात्मक जन आंदोलन के जरिए देश को आजादी की राह दिखाई थी। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि दांडी यात्रा विश्व के बड़े आंदोलनों में शामिल रही है और इसने आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी थी।

इधर दांडी मार्च की वर्षगांठ पर जैसलमेर में भी शांति मार्च निकाला गया। विजय स्तंभ से शुरू हुआ यह मार्च हनुमान चौराहे स्थित गांधी दर्शन तक पहुंचा, जहां महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद प्रतिभागियों ने खादी परिषद तक पैदल मार्च किया।

कार्यक्रम संयोजक उम्मेद सिंह तंवर ने बताया कि वर्ष 1930 में अंग्रेजों द्वारा नमक पर लगाए गए कर के विरोध में महात्मा गांधी के नेतृत्व में साबरमती से दांडी तक पदयात्रा कर नमक कानून को चुनौती दी गई थी। यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ था।

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