जयपुर। सिंधी भाषा दिवस (10 अप्रैल) के अवसर पर देश को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक सौगात मिली। नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में सी.पी. राधाकृष्णन ने सिंधी भाषा (देवनागरी लिपि) में प्रकाशित भारतीय संविधान का विधिवत विमोचन किया।
इस अवसर पर उन्होंने सिंधी समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि देश के विकास में इस समाज की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सिंधी समाज की निष्ठा, परोपकार और समर्पण भावना को प्रेरणादायक बताते हुए प्रधानमंत्री के बधाई संदेश का वाचन किया।
इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सिंधी समाज देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान दे रहा है। उन्होंने बताया कि देश की कुल जनसंख्या में लगभग 1 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के बावजूद सिंधी समाज का जीडीपी में करीब 20 प्रतिशत, आयकर में 24 प्रतिशत तथा चैरिटी में 22 प्रतिशत तक योगदान है। उन्होंने सिंधी भाषा की समृद्धि का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें 52 अक्षर हैं और इसका साहित्य अत्यंत समृद्ध है।
कार्यक्रम में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सिंधी समाज के विभाजन के बाद के संघर्ष और पुनर्स्थापन की यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि सिंधी समाज शरणार्थी नहीं, बल्कि “पुरुषार्थी” रहा है और आज विश्वभर में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है।
यह पहल न केवल सिंधी भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत साबित होगी। समारोह में देशभर से आए सिंधी समाज के गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में इंदौर से विशाल गिडवाणी तथा जयपुर से गोरधन आसनानी, मुकेश लखयानी, तुलसी संगतानी, गोविंद गुरबानी, श्याम सतवानी और भरत आसनानी सहित कई प्रमुख समाजसेवी उपस्थित रहे।




















