जयपुर। सिंधी समाज के देश-विदेश में संचालित 150 प्रेम प्रकाश आश्रमों ने ‘श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ’ की वाणी को स्कूल और कॉलेजों के हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल कराने की मांग उठाई है। जयपुर स्थित एमआई रोड के श्री अमरापुर स्थान से संतों ने विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, शिक्षा मंत्री और पाठ्यपुस्तक मंडल को पत्र भेजकर ग्रंथ को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की मांग की।
संत मोहन प्रकाश महाराज एवं स्वामी मनोहर लाल ने बताया कि स्वामी टेऊँराम जी महाराज की वाणी में सामाजिक समरसता और विश्व बंधुत्व का संदेश निहित है। उन्होंने कहा कि मीरा, कबीर, सूरदास और गुरु नानक की तरह उनकी शिक्षाएं भी समाज को नई दिशा देती हैं।
करीब 800 पृष्ठों के ‘प्रेम प्रकाश ग्रंथ’ में 1500 दोहे, 800 पद्य, 500 छंद और 2000 भजनों का संग्रह है। समाज का मानना है कि इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने से युवाओं में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का विकास होगा।



















