दो युवा आईटी इंजीनियरों ने समझी पीएम की पीड़ा और शुरू कर दी शेयरिंग बस

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जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और कार शेयरिंग को प्रोत्साहित करने के आह्वान से प्रेरित होकर आईटी इंजीनियर आशुतोष भट्ट और अभिषेक शर्मा ने ऑफिस ग्लाइडर नामक ऐप आधारित साझा वातानुकूलित बस सेवा की शुरुआत की है। राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक जाम, ईंधन की बढ़ती खपत और प्रदूषण जैसी शहरी चुनौतियों के बीच सार्वजनिक परिवहन और वाहन साझाकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक अभिनव पहल है।

यह राजस्थान सरकार के आई-स्टार्ट से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप है। इसका उद्देश्य निजी वाहनों पर निर्भरता कम कर शहर में यातायात दबाव घटाना, प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग देना तथा रोजाना वाहन चलाने से होने वाले मानसिक एवं शारीरिक तनाव को कम करना है।

ऑफिस ग्लाइडर विशेष रूप से सचिवालय और आसपास स्थित सरकारी कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए तैयार किया गया है। इस सेवा के माध्यम से कर्मचारी मोबाइल एप्लिकेशन द्वारा साप्ताहिक अथवा मासिक आधार पर सीट आरक्षित कर सकते हैं। सेवा में घर के नजदीक से पिकअप एवं ड्रॉप सुविधा, आरक्षित सीट, बस की लाइव ट्रैकिंग, सुरक्षित यात्रा वातावरण और आरामदायक छोटी वातानुकूलित बसों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

स्टार्टअप संस्थापक आशुतोष भट्ट ने बताया कि जब उन्होंने विभिन्न सरकारी कार्यालयों में जाकर कर्मचारियों से संवाद किया तो बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने साझा परिवहन व्यवस्था में रुचि दिखाई। सचिवालय, स्वास्थ्य भवन, योजना भवन, उद्योग भवन, ए.जी. कार्यालय और आयकर विभाग सहित कई कार्यालयों के 150 से अधिक कर्मचारियों ने इस पहल को सकारात्मक बताते हुए सुझाव दिए। कर्मचारियों की मांग और प्रतिक्रिया के आधार पर मुरलीपुरा-सचिवालय- मुरलीपुरा परीक्षण मार्ग को अंतिम रूप दिया गया और इसका संचालन शुरू किया गया।

आशुतोष भट्ट ने बताया कि पिछले 15 दिनों तक कर्मचारियों को नि: शुल्क यात्रा कराकर सेवा का सफल परीक्षण किया गया। परीक्षण अवधि के दौरान कर्मचारियों ने समय की बचत, तनावमुक्त यात्रा और पार्किंग की परेशानी से राहत मिलने जैसे अनुभव साझा किए। अब यह सुविधा लागत मूल्य पर उपलब्ध कराई जा रही है ताकि अधिक से अधिक लोग निजी वाहनों के बजाय साझा सार्वजनिक परिवहन को अपनाने के लिए प्रेरित हों।

उल्लेखनीय है कि यदि एक बस में 20 से 35 कर्मचारी एक साथ यात्रा करते हैं तो इससे सडक़ पर उतने ही निजी वाहन कम होंगे। इससे ईंधन की बचत, कार्बन उत्सर्जन में कमी और शहर के ट्रैफिक दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। जानकारों का मानना है कि भविष्य का शहरी परिवहन साझा एवं तकनीक आधारित मॉडल पर ही आधारित होगा।

ऑफिस ग्लाइडर के सह-संस्थापक अभिषेक शर्मा ने बताया कि आने वाले समय में कर्मचारियों की मांग और फीडबैक के आधार पर जयपुर के अन्य प्रमुख मार्गों पर भी यह सेवा विस्तारित की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार भी सहयोग चाहिए। यह केवल एक व्यावसायिक सेवा नहीं बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जुड़ा अभियान है, जिसका उद्देश्य लोगों को कार शेयरिंग और सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

शहर में तेजी से बढ़ते ट्रैफिक और पार्किंग संकट के बीच युवाओं की यह पहल अब एक नए शहरी परिवहन मॉडल के रूप में चर्चा में है। यदि सरकारी और निजी संस्थानों के कर्मचारी इस प्रकार की साझा परिवहन सेवाओं को अपनाते हैं तो इससे न केवल ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत के राष्ट्रीय प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।

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