भक्ति भाव से मनाया गया भक्त शिरोमणि गोकुलचंद मिश्र का गुरु वंदना दिवस

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Guru Vandana Day of devotee Shiromani Gokulchand Mishra was celebrated with devotion.
Guru Vandana Day of devotee Shiromani Gokulchand Mishra was celebrated with devotion.

जयपुर। श्री श्याम प्राचीन मंदिर में शुक्रवार को भक्त शिरोमणि पंडित गोकुलचंद मिश्र का 48वां गुरु वंदना दिवस श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बाबा श्याम का भव्य दरबार सजाया गया और फूल बंगला झांकी आकर्षण का केंद्र रही।

मंदिर महंत लोकेश मिश्रा ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः बाबा श्याम की पूजा-अर्चना एवं पंचामृत अभिषेक के साथ हुई। इसके बाद गौ सेवा करते हुए गायों को हरा चारा खिलाया गया तथा कानोता स्थित आश्रम में भोजन प्रसादी का वितरण किया गया।

उन्होंने बताया कि पंडित गोकुलचंद मिश्र की पांचवीं पीढ़ी आज भी मंदिर की सेवा-पूजा कर रही है। करीब 62 वर्ष पूर्व पंडित गोकुलचंद मिश्र खाटूधाम के निज मंदिर से ज्योत लेकर जयपुर आए थे और राजधानी में श्याम नाम की पहली ज्योत प्रज्ज्वलित कर मंदिर की स्थापना की थी।

शाम को मंदिर परिसर में अखंड ज्योत प्रज्वलित कर बाबा श्याम की फूल बंगला झांकी सजाई गई तथा ऋतु व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। आमंत्रित भजन गायकों ने भजनों की स्वर लहरियों से लखदातार का गुणगान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और हजारों भक्तों ने पंगत प्रसादी ग्रहण की।

गुरुवंदना महोत्सव के दौरान पंडित गोकुलचंद मिश्र के चित्रपट की पूजा-अर्चना भी की गई। परिवारजनों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
महंत लोकेश मिश्रा ने बताया कि वर्ष 1960 में बाबा श्याम के प्रचार-प्रसार के लिए आलू सिंह महाराज, मांगीलाल सारडा, राधेश्याम सर्राफ और देवीसहाय खाटूवाले के सहयोग से श्री श्याम सत्संग मंडल की स्थापना की गई थी। इसके बाद घर-घर जाकर श्याम बाबा के कीर्तन और भजनों के माध्यम से भक्ति का प्रचार किया गया।

उन्होंने बताया कि पंडित गोकुलचंद मिश्र खाटू श्याम मंदिर के प्रथम पुजारी थे। उनका जन्म खाटूधाम में हुआ था और बचपन से ही वे बाबा श्याम की सेवा में समर्पित रहे। अस्वस्थ होने पर वे जयपुर आ गए और कावटियों का खुर्रा स्थित अपने निवास से श्याम भक्ति का प्रचार-प्रसार शुरू किया। वर्ष 1962 में उन्होंने जयपुर में पहली बार श्याम नाम की ज्योत जगाई, जिसके बाद शहर में श्याम भक्ति का विस्तार हुआ।

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