डेंगू बना साल भर का खतरा,समय पर पहचान और बचाव जरूरी : डॉ. पंकज आनंद

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Dengue Becomes a Year-Round Threat; Timely Detection and Prevention Are Essential: Dr. Pankaj Anand
Dengue Becomes a Year-Round Threat; Timely Detection and Prevention Are Essential: Dr. Pankaj Anand

जयपुर। देशभर में डेंगू अब केवल मौसमी बीमारी नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभर रहा है। विशेषकर मानसून और उसके बाद के महीनों में डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

डॉ. पंकज आनंद ने बताया कि डेंगू एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है, जो दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है। शहरी क्षेत्रों में ठहरा हुआ पानी, घनी आबादी और खराब सफाई व्यवस्था इसके प्रसार को बढ़ावा देती है।

उन्होंने बताया कि कूलर, गमलों, निर्माण स्थलों और खुले कंटेनरों में जमा पानी डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के पनपने के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा जाम नालियां, कचरे का उचित निपटान न होना तथा गर्म एवं आर्द्र मौसम भी संक्रमण का खतरा बढ़ाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू के शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में तेज पीड़ा, मतली, उल्टी, थकान और त्वचा पर चकत्ते शामिल हैं। वहीं लगातार उल्टी, पेट दर्द, असामान्य रक्तस्राव और प्लेटलेट्स में गिरावट जैसे लक्षण संक्रमण की गंभीर स्थिति की ओर संकेत करते हैं।

डॉ. आनंद ने बताया कि डेंगू की जांच के लिए शुरुआती चरण में एनएस1 एंटीजन टेस्ट तथा बाद के चरण में आईजीएम और आईजीजी एंटीबॉडी टेस्ट किए जाते हैं। इसके अलावा प्लेटलेट्स की निगरानी के लिए सीबीसी जांच भी आवश्यक होती है। उन्होंने सलाह दी कि डेंगू के मौसम में लगातार तेज बुखार होने पर तुरंत जांच करवानी चाहिए और लक्षण बढ़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि डेंगू के लिए फिलहाल कोई विशेष एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है, लेकिन समय पर उपचार और उचित देखभाल से गंभीर परिणामों को रोका जा सकता है। मरीज को पर्याप्त तरल पदार्थ, डॉक्टर की सलाह अनुसार दवाएं और नियमित मेडिकल मॉनिटरिंग की आवश्यकता होती है।

गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है। डॉक्टरों ने डेंगू से बचाव के लिए घरों में पानी जमा नहीं होने देने, पानी की टंकियों की नियमित सफाई, पूरे बाजू के कपड़े पहनने, मच्छररोधी उत्पादों के उपयोग तथा सामुदायिक स्वच्छता अभियानों में भागीदारी की अपील की है। उनका कहना है कि छोटी-छोटी सावधानियां डेंगू जैसी गंभीर बीमारी से बचाव में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

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