जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) कोटा इकाई ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में घटिया निर्माण सामग्री उपयोग कर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के मामले में सार्वजनिक निर्माण विभाग के तीन तत्कालीन अधिशासी अभियंताओं और एक संवेदक को गिरफ्तार किया है। जहां आरोपितों को मंगलवार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायालय प्रतापगढ़ में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
एसीबी रेंज कोटा प्रभारी ओम प्रकाश मीणा ने बताया कि प्रतापगढ़ जिले में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत लेवापाड़ा, हीरापाड़ा और जापाकॉलोनी संपर्क सड़कों के निर्माण में घटिया सामग्री उपयोग करने, निर्माण के दौरान ही सड़कें टूटने, अधूरे कार्य को पूर्ण दिखाकर भुगतान लेने और बिना कार्य किए बिल भुगतान करने की शिकायत मिली थी।
इस शिकायत के आधार पर एसीबी चौकी प्रतापगढ़ द्वारा 19 जुलाई 2013 को आकस्मिक जांच की गई। जिसके बाद 18 नवंबर 2013 को मामला दर्ज किया गया। मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय स्वर्णकार ने की।
जांच में तत्कालीन अधिशाषी अभियंता सायरमल मीणा, एन.एल. परमार, गिरधारी लाल वर्मा तथा संवेदक विनोद कोडिया की मिलीभगत से राज्य सरकार को 11 लाख 78 हजार 752 रुपए की आर्थिक हानि पहुंचाना प्रमाणित पाया गया।
एसीबी मुख्यालय द्वारा चालान पेश करने का निर्णय लेने के बाद राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति जारी हुई। इसके बाद चारों आरोपितों को 18 मई को गिरफ्तार कर 19 मई को न्यायालय में पेश किया गया।



















