जयपुर। भगवान राम के चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या से लौटने और राज्याभिषेक के प्रसंग के साथ ब्रह्मपुरी रोड स्थित मंगोड़ी वालों की बगीची स्थित श्रीमोहन मंदिर प्रांगण में श्री रामकथा सोमवार का समापन हुआ। व्यासपीठ से अकिंचन महाराज ने कहा कि राम राज्य आज भी आ सकता है लेकिन इसके लिए प्रभु श्री राम जैसे आदर्शों और मर्यादा के पालन करने की आवश्यक्ता है।
राम कथा के प्रत्येक पात्र ने आदर्शों के कीर्तिमान स्थापित किए। इन पात्रों के जीवन से एक-एक सीख भी व्यक्ति ग्रहण कर ले तो कलियुग में भी राम राज्य जैसा स्वर्गिक परिस्थितियों का निर्माण संभव है। कथा का आयोजन सखी सहेली महिला मंडल की ओर से किया गया।
सीताराम मंदिर में हुआ विद्वानों का सम्मान:
छोटी चौपड़ स्थित श्री सीताराम जी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का सोमवार को विश्राम हुआ। व्यासपीठ से आशीष महाराज ने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष सहित अन्य प्रसंगों पर प्रवचन किए। पुरानी बस्ती स्थित गोपीनाथ जी मंदिर में भी आयोजित भागवत कथा का विश्राम हुआ। रामबाबू झालानी ने बताया श्रीमद् भागवत कथा में 121 पोथी आचार्यों का अभिनंदन किया गया।



















