अशोक गहलोत का बयान हार की बौखलाहट और कांग्रेस की तुष्टिकरण राजनीति का परिचायक : घनश्याम तिवाड़ी

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Ghanshyam Tiwari
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जयपुर। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा दिए गए बयान को अनर्गल प्रलाप बताते हुए कहा कि गहलोत हार की बौखलाहट में अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए इस प्रकार की बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके नेताओं को इतिहास से सीख लेनी चाहिए। इंदिरा गांधी और उनके पिता जी ने दो बार प्रतिबंध लगाया लेकिन दोनों बार मुंह की खानी पड़ी। 1948 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाया गया और 1975 में देश पर आपातकाल थोपा गया, लेकिन दोनों ही फैसले कांग्रेस पार्टी को झकमार कर वापस लेने पड़े। कांग्रेस का जनाधार लगातार सिमटता जा रहा है।

तिवाड़ी ने कहा कि कांग्रेस ने देश में हिन्दू-मुस्लिम राजनीति की शुरुआत बहुत पहले कर दी थी। कांग्रेस ने 1916 में ही भारत विभाजन की नींव रख दी थी। 1916 के लखनऊ समझौते में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच अलग-अलग प्रतिनिधित्व की व्यवस्था स्वीकार की गई तथा बाद में खिलाफत आंदोलन के दौरान भी कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के साथ राजनीतिक समझौते किए। कांग्रेस की नीतियों ने ही अंततः देश के विभाजन का मार्ग प्रशस्त किया। सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता आयोजित कर गहलोत को हिन्दुओं से माफी मांगने की अपील की। प्रेसवार्ता में भाजपा प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी, भूपेंद्र सैनी उपस्थित रहे।

सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि विश्व में एक मात्र भारत ही ऐसा देश है, जहां देश का विभाजन धर्म के आधार पर किया गया। अन्य देशों में राजनीति के आधार पर या क्षेत्र के आधार पर विभाजन किया गया था, लेकिन कांग्रेस की नीति और मुस्लिम लीग का समर्थन ने धर्म के नाम पर देश का विभाजन कर दिया। विभाजन के बाद भी कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति जारी रही। कांग्रेस भाजपा पर हिन्दुत्व की राजनीति का आरोप लगाती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी हिन्दुत्व को ही आदर्श मानती है।

तिवाड़ी ने कहा कि गहलोत कांग्रेस के प्रवक्ता के तौर पर नहीं, मुस्लिम लीग के प्रवक्ता के तौर पर बयान दे रहे है। गहलोत साहब को आज के कुछ परिणाम देखने चाहिए। आज असम में कांग्रेस के कुल 20 विधायक जीते, इनमें से 19 मुस्लिम, बंगाल में दो जीते, दोनों की दोनों ​मुस्लिम है। इतना ही नहीं, कांग्रेस अब केरल को भी खतरे में डाल रही है। केरल में कांग्रेस ने मुस्लिम लीग से समझौता किया, उस मुस्लिम लीग से समझौता किया जिसने भारत का विभाजन करवाया, जिस मुस्लीम लीग के कारण करोड़ों लोगों की हत्या, लाखों महिलाओं से बलात्कार, हजारों लोगों को घर छोडना पड़ा। ये वही मुस्लिम लीग है जो 1947 से पहले थी, इसका वही घोषणा पत्र और वही निशान है। कांग्रेस ने केरल में 22 मुस्लिम लीग के विधायक को जीताया है। इस प्रकार का तुष्टिकरण करने वाली कांग्रेस के नेता अशोक गहलोत अपने गिरेबा में झाककर देखें।

सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि संविधान की दुहाई देने वाली कांग्रेस को आपातकाल और 42वें संविधान संशोधन की याद करनी चाहिए। आपातकाल भारतीय लोकतंत्र और संविधान की आत्मा पर सबसे बड़ा प्रहार था। भाजपा की सरकार ने संविधान में 44 और 46वें संशोधन करके लोकतांत्रिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करने का कार्य किया गया था।

तिवाड़ी ने कहा कि अशोक गहलोत का बयान राजनीतिक हताशा का परिणाम है और इसका उद्देश्य हिन्दूओं में भ्रम फैलाना तथा मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति को साधना है। उन्होंने कांग्रेस को मुस्लिम लीग का दूसरा संस्करण बताते हुए कहा कि पार्टी को देश और हिन्दू समाज से माफी मांगनी चाहिए। तिवाड़ी ने कहा कि अशोक गहलोत राहुल गांधी को अपना नेता मान रहे है, उनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी 99 चुनाव हार चुकी है और हम चाहते है कि राहुल गांधी अपना शतक पूरा करें।

सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि कांग्रेस देश को बांटने का काम करती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी बिना किसी भेदभाव के राष्ट्र विकास और राष्ट्र प्रथम की नीति पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं संचालित की हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना 13.45 लाख, उज्ज्वला योजना 37 प्रतिशत, मुद्रा योजना 36 प्रतिशत, पीएम किसान सम्मान निधि 33 प्रतिशत, स्किल इंडिया 22 प्रतिशत लाभ मुस्लिम वर्ग केे लोगों को दिया है। इतना ही नहीं, 3 करोड़ अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजनाओं में से 1.63 करोड़ इस वर्ग के छात्र है। भाजपा सरकार ने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र के साथ कार्य किया है।

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