जयपुर। झोटवाड़ा थाना पुलिस और जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए देश के कुख्यात अंतरराज्यीय नकबजन सतपाल सिंह उर्फ फौजी और उसके साथी पवन कुमार तंवर को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों ने झोटवाड़ा क्षेत्र में एक सूने फ्लैट का ताला तोड़कर 38.66 लाख रुपये नकद और सोने-चांदी के आभूषण चोरी कर लिए थे। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से वारदात में प्रयुक्त कार तथा चोरी का माल बरामद कर लिया है। फिलहाल आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।
पुलिस उपायुक्त (जयपुर पश्चिम) प्रशांत किरण ने बताया कि झोटवाड़ा थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए देश के कुख्यात अंतरराज्यीय नकबजन सतपाल सिंह चौहान उर्फ सतपाल फौजी (46) निवासी मानेसर, जिला गुरुग्राम (हरियाणा) तथा पवन कुमार तंवर (39) निवासी गांव कनीना जिला महेंद्रगढ़ (हरियाणा) को गिरफ्तार किया है।
पुलिस उपायुक्त (जयपुर पश्चिम) के अनुसार सतपाल फौजी हरियाणा के गुरुग्राम जिले में आईएमटी मानेसर थाना क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है। उसके खिलाफ हत्या, फायरिंग, लूट, मारपीट और नकबजनी सहित 72 से अधिक आपराधिक मामले विभिन्न राज्यों में दर्ज हैं।
वह पूर्व में कई बार जेल जा चुका है और हाल ही में 10 फरवरी 2026 को उदयपुर जेल से जमानत पर रिहा हुआ था। जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर से आपराधिक गतिविधियां शुरू कर दीं। पूछताछ में उसने देश के विभिन्न हिस्सों में आधा दर्जन से अधिक नई वारदातें करना स्वीकार किया है। वहीं उसके साथी पवन कुमार के खिलाफ भी हरियाणा और ओडिशा में आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।
पुलिस पूछताछ में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपित सतपाल फौजी अपनी पहचान छिपाने और पुलिस से बचने के लिए विशेष प्रकार का आर्टिफिशियल मुखौटा बनवा रहा था। इसके लिए उसने अपने एक परिचित को दो लाख रुपये अग्रिम राशि भी दे रखी थी। पुलिस का मानना है कि आरोपित भविष्य की वारदातों में हुलिया बदलकर कानून से बचने की तैयारी कर रहा था।
पुलिस जांच में सामने आया कि सतपाल फौजी वर्ष 2004 में हत्या और फायरिंग के मामले में पहली बार जेल गया था। जेल प्रवास के दौरान उसके संपर्क देशभर के कई कुख्यात अपराधियों से बने। बाद में उसने अपने प्रभाव और आर्थिक लाभ के लिए स्थानीय युवकों, रिश्तेदारों और परिचितों को लालच देकर गैंग में शामिल किया।
पुलिस अब आरोपियतों से अन्य राज्यों में की गई वारदातों तथा चोरी के शेष माल के संबंध में गहन पूछताछ कर रही है। झोटवाड़ा थानाधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि परिवादी राकेश अग्रवाल ने 13 जून 2026 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह 9 जून को अपने परिवार के साथ बाहर गए थे। 12 जून को लौटने पर फ्लैट के ताले टूटे मिले और घर में रखी 38 लाख 66 हजार रुपये नकद राशि तथा सोने-चांदी के आभूषण गायब मिले।
इस संबंध में झोटवाड़ा थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी और आला पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर एक हजार सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण कर तथा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश किया। गिरफ्तार आरोपित हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, पंजाब, मध्यप्रदेश और दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में सक्रिय रहे हैं तथा कई संगीन वारदातों में उनकी संलिप्तता सामने आई है।
यह गैंग पहले सूने मकानों और फ्लैटों की रेकी करती थी। वारदात के दौरान अपनी गाड़ी घटनास्थल से दूर खड़ी कर देती थी और हुलिया बदलकर चोरी को अंजाम देती थी, जिससे पहचान करना मुश्किल हो जाता था।
इस मामले के खुलासे में तकनीकी शाखा के कांस्टेबल राजमहेंद्र सिंह तथा पुलिस थाना उद्योग नगर सीकर के कांस्टेबल महावीर की विशेष भूमिका रही। दोनों ने आरोपितों की चाल-ढाल और हुलिए के आधार पर उसे ट्रेस करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा डीएसटी प्रभारी गणेश सैनी, सहायक उपनिरीक्षक रामसिंह, हेड कांस्टेबल बलराम, मालीराम, सज्जन सिंह, सुनील कुमार, राजेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह तथा कांस्टेबल सुरेश कुमार, राजेंद्र और सुनील आरोपितों की गिरफ्तारी में विशेष भूमिका रही।



















