जयपुर। प्रदेश में शिक्षक तबादलों को लेकर सियासत और शिक्षक संगठनों का विरोध तेज हो गया है। शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार पर पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू नहीं करने और तृतीय श्रेणी शिक्षकों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है, जबकि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान सेवा नियमों में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के जिले से बाहर तबादले का प्रावधान नहीं है। साथ ही उन्होंने नई स्थानांतरण नीति जल्द लागू करने की बात भी कही।
शिक्षक संघ सियाराम के संरक्षक सियाराम शर्मा ने कहा कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने का वादा किया था, लेकिन सरकार के ढाई वर्ष पूरे होने के बाद भी नीति तैयार नहीं हो सकी। उनका आरोप है कि तबादलों के लिए न स्पष्ट मानदंड तय हैं, न आवेदन की अंतिम तिथि और न ही जांच की पारदर्शी व्यवस्था, जिससे “स्थानांतरण उद्योग” बनने की आशंका बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि पूर्व में रिक्त पदों के आधार पर तृतीय श्रेणी शिक्षकों के अंतरजिला तबादले होते रहे हैं और वर्ष 2018 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी के कार्यकाल में भी ऐसे स्थानांतरण हुए थे।
शिक्षक संघ एकीकृत के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रणजीत मीणा ने कहा कि प्रदेश के ढाई लाख से अधिक तृतीय श्रेणी शिक्षक पिछले आठ वर्षों से तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।
उन्होंने बताया कि 40 से अधिक शिक्षक संगठनों ने संयुक्त रूप से सरकार को ज्ञापन देकर तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले, डीपीसी और पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होने पर नए शैक्षणिक सत्र में काली पट्टी बांधकर विरोध, शिक्षा मंत्री के कार्यक्रमों में प्रदर्शन तथा आवश्यकता पड़ने पर कार्य बहिष्कार की चेतावनी भी दी गई है।
वहीं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि स्थानांतरण के इच्छुक कर्मचारियों से आवेदन लिए जा रहे हैं और फिलहाल तृतीय श्रेणी शिक्षकों को छोड़कर अन्य सभी श्रेणियों के तबादले किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों की नियुक्ति जिला कैडर में होती है और दूसरे जिले में स्थानांतरण होने पर उनकी वरिष्ठता प्रभावित होती है।
वर्ष 2018 में हुए अंतरजिला तबादलों के बाद भी वरिष्ठता को लेकर विवाद और आंदोलन हुए थे। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री इस संबंध में कोई निर्देश देंगे तो सरकार उसी अनुरूप निर्णय लेगी। साथ ही नई ट्रांसफर पॉलिसी प्रक्रियाधीन है और जल्द लागू की जाएगी। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



















