रेलिंग तोड़ फुटपाथ पर चढ़ा बेकाबू ट्रेलर: पिता समेत तीन मासूमों की मौत

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Out-of-control trailer breaks railing and mounts the footpath.
Out-of-control trailer breaks railing and mounts the footpath.

जयपुर। राजधानी में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया। श्याम नगर थाना क्षेत्र में 200 फीट बाइपास स्थित कमला नेहरू नगर के पास तेज रफ्तार पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) से भरा ट्रेलर रेलिंग तोड़ते हुए फुटपाथ पर चढ़ गया और बस का इंतजार कर रहे एक परिवार को कुचल दिया। हादसे में पिता और उसके तीन मासूम बेटों की मौत हो गई, जबकि मां गंभीर रूप से घायल हो गई।

हादसा इतना भयावह था कि तीनों बच्चों के शव क्षत-विक्षत हो गए और टक्कर के बाद परिवार के सदस्य नाले में जा गिरे। चालक और खलासी ट्रेलर छोड़कर मौके से फरार हो गए।

एडिशनल डीसीपी (जयपुर दक्षिण) ललित किशोर शर्मा ने बताया हादसा मंगलवार सुबह करीब 8:46 बजे हुआ। मृतकों की पहचान राजसमंद जिले के जैतपुरा निवासी चंद्रप्रकाश (40), उनके बेटे रमेश (11), रतन (10) और दीपक (8) के रूप में हुई है। घायल कैलाशी (35) का एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में उपचार चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार उनके दोनों पैरों में गंभीर चोटें आई हैं।

गांव जाने के लिए बस का इंतजार कर रहा था परिवार

थानाधिकारी दलबीर ने बताया कि बागरी समाज का यह परिवार जयपुर के वैशाली नगर क्षेत्र में किराये के मकान में रहता था और झाड़ू, गुब्बारे, खिलौने व अन्य छोटे-मोटे सामान बेचकर परिवार का भरण-पोषण करता था। मंगलवार सुबह पूरा परिवार राजसमंद स्थित अपने गांव जैतपुरा जाने के लिए 200 फीट बाइपास पर बस का इंतजार कर रहा था। इसी दौरान दिल्ली की ओर से अजमेर की तरफ जा रहा तेज रफ्तार ट्रेलर अनियंत्रित होकर रेलिंग तोड़ते हुए फुटपाथ और नाले के कवर पर चढ़ गया और परिवार को अपनी चपेट में ले लिया।

तीन बच्चों की मौके पर मौत, पिता ने अस्पताल में तोड़ा दम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रेलर की रफ्तार इतनी अधिक थी कि तीनों बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि एक बच्चे का शव दूर नाले में जा गिरा और घटनास्थल पर शवों के अवशेष बिखर गए। गंभीर रूप से घायल चंद्रप्रकाश और उनकी पत्नी कैलाशी को स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से एसएमएस अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान चंद्रप्रकाश ने दम तोड़ दिया।

घर पर थे दो बच्चे, बच गई उनकी जान

बताया गया कि दंपती के कुल पांच बच्चे हैं। हादसे के समय दो बच्चे घर पर थे, जिससे उनकी जान बच गई। एक ही दिन में पति और तीन बेटों को खोने के बाद कैलाशी गहरे सदमे में हैं।

रेलिंग तोड़कर नाले में फंसा ट्रेलर

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ट्रेलर ने पहले सड़क किनारे लगी लोहे की रेलिंग तोड़ी, फिर करीब 20 मीटर तक नाले के कवर को तोड़ते हुए परिवार को कुचल दिया। टक्कर के बाद ट्रेलर नाले में फंस गया। क्रेन की मदद से बाद में उसे हटाया गया। हादसे के कारण कुछ समय तक यातायात भी बाधित रहा।

एफएसएल टीम ने जुटाए साक्ष्य

घटना की सूचना मिलते ही श्याम नगर थाना पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, एफएसएल टीम और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। एफएसएल टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जब्त की।

ट्रेलर में पहले से थे पांच चालान लंबित

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे में शामिल ट्रेलर जोधपुर आरटीओ में पंजीकृत है। इस वाहन पर पहले से पांच ट्रैफिक चालान लंबित हैं। इनमें सुजानगढ़, बीकानेर, जयपुर, नागौर और सीकर में ओवरलोडिंग एवं यातायात नियमों के उल्लंघन के मामले शामिल हैं। इसके बावजूद ट्रेलर सड़क पर दौड़ रहा था। पुलिस अब वाहन के दस्तावेजों और मालिक की भूमिका की भी जांच कर रही है।

फरार चालक की तलाश

ट्रैफिक थाना प्रभारी अमीर हसन ने बताया कि ट्रेलर में पीओपी भरा हुआ था और वह दिल्ली से अजमेर की ओर जा रहा था। हादसे के बाद चालक और खलासी मौके से फरार हो गए। ट्रेलर को जब्त कर लिया गया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चालक की पहचान कर उसकी तलाश की जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि हादसे के समय चालक नशे में था या अत्यधिक गति के कारण वाहन अनियंत्रित हुआ।

स्थानीय लोगों ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में तेज रफ्तार वाहनों और गलत दिशा में वाहन चलाने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उनका आरोप है कि पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं होने के कारण यहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। उन्होंने प्रशासन से सड़क सुरक्षा के स्थायी इंतजाम करने की मांग की।

पूर्व मुख्यमंत्री ने जताया शोक

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की और घायल महिला के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

पुलिस ने चारों शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। इस मामले में श्याम नगर थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर फरार चालक की तलाश और हादसे के सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

इधर जांच में सामने आई सड़क डिजाइन की खामी

हादसे के बाद हुई जांच-पड़ताल में सामने आया कि हीरापुरा पुलिया से होटल हाईवे किंग तक करीब 100 मीटर तक सड़क पर डिवाइडर नहीं बना हुआ है। जबकि पुलिया उतरते ही डिवाइडर होना चाहिए, ताकि कोई वाहन वहां से यू-टर्न न ले सके।
इस खुले हिस्से में ट्रैफिक कई दिशाओं में चलता है। कुछ वाहन अजमेर रोड की ओर निकल जाते हैं, कुछ नारायण विहार की सर्विस लाइन में मुड़ते हैं और कई वाहन पुलिया खत्म होते ही यू-टर्न लेते हैं। कमला नेहरू नगर की सर्विस लाइन से आने वाले वाहन भी इसी स्थान से यू-टर्न लेकर अजमेर रोड पर चढ़ते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार पुलिया से उतरने के बाद करीब 25 प्रतिशत वाहन इसी स्थान से यू-टर्न लेते हैं, जिससे लगातार दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

सिर्फ एक बोर्ड लगाकर पूरी की औपचारिकता

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि एनएचएआई ने यहां केवल एक साइन बोर्ड लगाया है, जिस पर लिखा है कि आगे से यू-टर्न लेना गलत है। लेकिन मुख्य हाईवे और सर्विस लेन को अलग दिखाने के लिए पर्याप्त संकेतक, एरो मार्किंग या ब्लिंकिंग लाइट तक नहीं लगाई गई है। रात के समय यहां सबसे अधिक परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि यदि डिवाइडर को सड़क से थोड़ा ऊंचा बनाया जाता या स्पष्ट मार्किंग की जाती तो कई दुर्घटनाएं रोकी जा सकती थीं।

अवैध बस स्टैंड से बढ़ी अव्यवस्था

कमला नेहरू नगर के सामने रोडवेज बस स्टैंड बनने के बाद हीरापुरा चौराहे पर बसें खड़ी करने पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद निजी बसें होटल हाईवे किंग के सामने खड़ी होने लगीं और पिछले करीब तीन महीने से यहां मुख्य हाईवे पर अवैध बस स्टैंड जैसा माहौल बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी वाहनों के चालकों को यहां अचानक भीड़ दिखाई देती है, जिससे वे गफलत में पड़ जाते हैं और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।

प्रशासन ने मानी समस्या

डीसीपी ट्रैफिक योगेश गोयल ने बताया कि 100 मीटर के खुले पैच के संबंध में एनएचएआई को लिखा जाएगा और गलत यू-टर्न रोकने के उपाय किए जाएंगे।
वहीं जयपुर आरटीओ प्रथम चंपालाल जीनगर ने कहा कि यह हादसा तेज रफ्तार ट्रेलर और चालक की लापरवाही के कारण हुआ। सड़क पर खड़े वाहनों पर नियमित कार्रवाई की जाती है।

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