बुधादित्य और शश राजयोग के दुर्लभ संयोग में 29 जुलाई को मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा महापर्व

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The grand festival of Guru Purnima will be celebrated on July 29.
The grand festival of Guru Purnima will be celebrated on July 29.

जयपुर। आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि पर इस बार कई दुर्लभ और अत्यंत शुभ योग बन रहे हैं। गुरु पूर्णिमा का यह पावन पर्व न केवल आध्यात्मिक उन्नति का अवसर प्रदान करता है, बल्कि भाग्य को मजबूत करने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने में भी विशेष सहायक माना जाता है।

ज्योतिषाचार्य पं. बनवारी लाल शर्मा के अनुसार यह पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी पावन तिथि पर महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था, इसलिए इसे ‘व्यास पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 28 जुलाई को सायं 6:18 बजे (कहीं 6:21 बजे दर्ज) से हो जाएगा, जिसका समापन 29 जुलाई को रात 8:05 बजे होगा।

ऐसे में उदयातिथि की मान्यता के अनुसार गुरु पूर्णिमा का मुख्य पर्व 29 जुलाई, बुधवार को ही मनाया जाएगा। इस दौरान गुरु पूजन और धार्मिक अनुष्ठान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। इस बार आषाढ़ी पूर्णिमा पर कई दुर्लभ और विशेष ग्रह योग बन रहे हैं।

बुधादित्य राजयोग:

सूर्य और बुध के एक ही राशि में होने से बुधादित्य राजयोग का निर्माण हो रहा है, जो 28 जुलाई से शुरू होकर गुरु पूर्णिमा पर प्रभावी रहेगा।

शश राजयोग: – इसके साथ ही शश राजयोग का शुभ संयोग भी बन रहा है। ज्योतिषविदों का मानना है कि इन शुभ योगों के दौरान किया गया कोई भी धार्मिक कार्य, ध्यान, मंत्र जप या ज्ञानार्जन का कार्य अक्षय और उत्तम फल प्रदान करता है।

हिंदू पंचांग में आषाढ़ मास को धर्म, दान और पुण्य के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। गुरु पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से पापों का नाश होता है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गुरु पूर्णिमा के साथ ही आषाढ़ मास का समापन हो जाएगा और अगले दिन से भगवान शिव का प्रिय ‘सावन मास’ प्रारंभ होगा।

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