जयपुर। एक महिला ने अपने ससुराल पक्ष पर घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना, दहेज के लिए परेशान करने, धमकाने तथा आर्थिक गतिविधियों में दबाव पूर्वक शामिल करने के आरोप लगाए हैं। इस संबंध में महिला ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी से मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच, न्याय और सुरक्षा दिलाने की मांग की है। महिला के अधिवक्ता ने भी मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
महिला के अनुसार वर्ष 2020 में उसका विवाह हुआ था। आरोप है कि विवाह के कुछ समय बाद ही उसके साथ मारपीट और मानसिक प्रताड़ना शुरू हो गई। महिला का दावा है कि उसे घर में बंद रखा जाता था, कई बार खाना नहीं दिया गया और दहेज को लेकर परेशान किया गया।
महिला ने आरोप लगाया कि विवाह से पहले उसके पति के वैवाहिक जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी उससे छिपाई गई थी। शादी के बाद जब उसे इस संबंध में जानकारी मिली और उसने ससुराल पक्ष से सवाल किए तो कथित रूप से उसके साथ मारपीट की गई तथा जान से मारने की धमकी दी गई।
महिला ने ससुराल पक्ष पर उसके नाम से बैंक खाते खुलवाने, वित्तीय लेन-देन कराने और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज तैयार करवाने के प्रयास का भी आरोप लगाया है। उसका कहना है कि इन गतिविधियों का विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसके माता-पिता को भी धमकाया गया।
महिला के मुताबिक उसके माता-पिता सरकारी कर्मचारी हैं। आरोप है कि उन्हें दूरस्थ स्थान पर स्थानांतरण करवाने की धमकी दी गई। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उस पर दबाव बनाकर विभिन्न दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए और अलग-अलग बैंक खातों से जुड़ी प्रक्रियाओं में शामिल किया गया।
महिला का कहना है कि वह शिकायत लेकर मालवीय नगर थाने पहुंची थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उसने अधिवक्ताओं की मदद ली और न्यायालय का रुख किया। महिला के अनुसार कानूनी सहायता मिलने के बाद एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
महिला ने कहा कि उसे अब भी अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता है। उसका आरोप है कि ससुराल पक्ष की ओर से पुलिस और प्रशासन में प्रभाव होने की बात कहकर उसे डराया जाता रहा।
महिला के अधिवक्ता ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने, महिला को न्याय दिलाने और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। अधिवक्ता का कहना है कि मामले में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर तथ्य सामने लाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि उचित कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय का रुख किया जाएगा।


















