जयपुर। भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को शहरभर में धूमधाम से मनाया जाएगा। गुरुवार को पूर्णिमा तिथि शुरू होने के साथ भद्रा भी रही, जो रात 9:52 बजे समाप्त हो गई। ऐसे में शुक्रवार को सूर्योदय भद्रा रहित होने से रक्षा सूत्र बांधना शास्त्र सम्मत रहेगा।
पंडित राजेश कुमार शर्मा के अनुसार 28 अगस्त को चंद्रमा कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। सुबह 7:28 बजे के बाद सुकर्मा योग बनेगा, जिसे शुभ कार्यों में सफलता और प्रगति देने वाला माना गया है। राखी बांधने का श्रेष्ठ समय सुबह 5:58 से 9:48 बजे तक रहेगा। इसके बाद दोपहर 12:03 से 12:53 बजे तक भी शुभ मुहूर्त रहेगा।
लाभ चौघड़िया सुबह 7:57 से 9:31 बजे, अमृत 9:31 से 11:05 बजे, शुभ 12:40 से 2:14 बजे, चर 5:22 से 6:57 बजे और लाभ रात 9:48 से 11:14 बजे तक रहेगा। इनमें लाभ और अमृत चौघड़िया को विशेष शुभ माना गया है। राहुकाल सुबह 11:05 से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा, इसलिए इस अवधि में राखी बांधने से बचने की सलाह दी गई है।
रक्षाबंधन के दिन आंशिक चंद्रग्रहण भी होगा, लेकिन भारतीय समयानुसार चंद्रमा क्षितिज से नीचे रहने के कारण यह भारत में दिखाई नहीं देगा। ग्रहण अदृश्य रहने के कारण इसका सूतक भी भारत में मान्य नहीं होगा। ऐसे में दिनभर धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ किए जा सकेंगे।
राखी की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई, फूल और राखी रखें। भाई को शुभ दिशा में बैठाकर रोली का तिलक लगाएं और अक्षत छिड़कें। इसके बाद दाहिनी कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर आरती करें और मिठाई खिलाएं। भाई बहन को उपहार देकर उसके सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लें। पूजा में खंडित राखी या अक्षत का प्रयोग नहीं करने की सलाह दी गई है।



















