जयपुर। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में श्री राम मंदिर प्रन्यास एवं श्री सनातन धर्म सभा की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को कथा स्थल भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। कथा व्यास आचार्य जैनेन्द्र कटारा ने श्रद्धालुओं को भागवत के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रसंगों का विस्तार से श्रवण कराया।
कथा में कपिल मुनि के उपदेश, ध्रुव चरित्र, दक्ष यज्ञ, भगवान शिव एवं माता सती के प्रसंग, शिव विवाह, भगवान ऋषभदेव के जन्म, राजा रहूगण और भरत चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
कपिल मुनि के उपदेश का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य कटारा ने कहा कि मनुष्य जीवन केवल भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति के लिए नहीं है। जीवन का उद्देश्य परमात्मा की भक्ति, सत्कर्म और आत्मज्ञान की प्राप्ति भी है। भक्ति और ज्ञान के माध्यम से मनुष्य मोह-माया के बंधन से मुक्त होकर जीवन को सार्थक बना सकता है।
इसके बाद ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि बालक ध्रुव की अटूट श्रद्धा, दृढ़ संकल्प और भगवान के प्रति समर्पण प्रेरणादायी है। सच्ची श्रद्धा और दृढ़ निश्चय से कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सकता है।
दक्ष यज्ञ, माता सती और भगवान शिव से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से अहंकार से दूर रहने का संदेश दिया गया। शिव विवाह के प्रसंग के दौरान कथा स्थल पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
भगवान ऋषभदेव के जन्म और उनके आदर्श जीवन का वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि मनुष्य को आत्मचिंतन और वैराग्य के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए परमात्मा की ओर अग्रसर होना चाहिए। भरत चरित्र के माध्यम से भी इसी आध्यात्मिक संदेश को विस्तार दिया गया।
कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भागवत कथा का श्रवण किया। सचिव अनिल खुराना ने बताया कि कथा प्रतिदिन शाम 4 से 7 बजे तक आयोजित की जा रही है। लक्ष्मण मलिक, जितेंद्र चड्ढा, तुलसी संगतानी सहित श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती उतारी।



















