निजी अस्पताल की बड़ी लापरवाही:दो डेड बॉडी की अदला-बदली से मचा हड़कंप

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जयपुर। दुर्गापुरा स्थित आंच हॉस्पिटल में शनिवार सुबह दो मृतकों की डेड बॉडी बदलने का मामला सामने आया। अस्पताल की लापरवाही से एक परिवार दूसरे मृतक की बॉडी लेकर करीब 20 किलोमीटर दूर रवाना हो गया। बाद में अस्पताल स्टाफ को गलती का पता चला तो नावां (डीडवाना-कुचामन) जा रहे परिवार को फोन कर वापस बुलाया गया। बॉडी वापस अस्पताल पहुंचने के बाद परिजनों ने अस्पताल के बाहर करीब दो घंटे तक हंगामा किया और धरने पर बैठ गए। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

17 सितंबर को भर्ती हुए थे दोनों मरीज

एसीपी शिवदयाल बाजिया के अनुसार 17 सितंबर को नावां निवासी 53 वर्षीय गिरधारी लाल और बानसूर (कोटपूतली-बहरोड़) निवासी घेसालाल को दुर्गापुरा स्थित आंच हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार रात दोनों की मौत हो गई। शनिवार सुबह अस्पताल स्टाफ ने गिरधारी लाल की बॉडी घेसालाल के परिजनों को सौंप दी। परिवार बॉडी लेकर घर के लिए रवाना हो गया। करीब 20 किलोमीटर दूर पहुंचने के बाद अस्पताल स्टाफ ने फोन कर बॉडी बदलने की जानकारी दी और परिवार को वापस अस्पताल बुलाया।

सुबह 8.30 बजे धरने पर बैठे परिजन

गलती की जानकारी मिलने के बाद गिरधारी लाल के परिजन भी अस्पताल पहुंचे। नाराज परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सुबह करीब 8.30 बजे अस्पताल के बाहर धरना शुरू कर दिया। करीब दो घंटे तक प्रदर्शन चला। मौके पर पहुंची जवाहर सर्किल थाना पुलिस ने परिजनों से समझाइश का प्रयास किया। परिजनों का आरोप था कि इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी अस्पताल प्रशासन का रवैया उचित नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने शुरुआत में उनकी शिकायत दर्ज करने से इनकार किया। बाद में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के हस्तक्षेप के बाद करीब 10 बजे एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद परिजनों का हंगामा शांत हुआ।

रिश्तेदार ने इलाज में भी लापरवाही का लगाया आरोप

गिरधारी लाल के रिश्तेदार रमेश चौधरी ने अस्पताल प्रशासन पर उपचार में भी गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि गिरधारी लाल 17 सितंबर से वेंटिलेटर पर थे और उनके फेफड़ों में संक्रमण था। परिजनों को मरीज से मिलने नहीं दिया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरधारी लाल की मौत दो दिन पहले ही हो गई थी, लेकिन अस्पताल की ओर से इलाज जारी होने की बात कही जाती रही। शनिवार सुबह उन्हें मौत की जानकारी दी गई।

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की गलती से बदली बॉडी

हॉस्पिटल नर्सिंग सोसायटी के प्रवक्ता राजवीर सिंह ने बताया कि डेड बॉडी शिफ्ट करने की निर्धारित प्रक्रिया होती है। अस्पताल के गेट पर खड़ी एंबुलेंस में नावां-कुचामन क्षेत्र के मरीज की बॉडी ले जानी थी, लेकिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की गलती तथा एंबुलेंस चालक या परिजनों की गफलत के कारण दूसरी बॉडी उसमें रखकर रवाना हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने जांच कमेटी गठित की है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।

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