जयपुर। गुलाबी नगरी में सोमवार को लोक संस्कृति, पारंपरिक मूल्यों और भारतीय ज्ञान परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला, जब ‘लोकमंथन यात्रा-जयपुर महानगर’ का भव्य आगाज हुआ। लोकमंथन-2026 आयोजन समिति की अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने आराध्य देव श्री गोविंद देवजी महाराज के दर्शन-पूजन के बाद जलेबी चौक से यात्रा के मुख्य रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
जलेबी चौक से प्रारंभ होकर यह सांस्कृतिक यात्रा हवामहल, बड़ी चौपड़ और अल्बर्ट हॉल के रास्ते महारानी कॉलेज पहुंची। यात्रा के स्वागत में पूरे मार्ग पर मनमोहक रंगोलियां सजाई गईं, वहीं विभिन्न व्यापार मंडलों व आमजन ने पदयात्रियों पर फूलों की बारिश की। यात्रा में शामिल लोक कलाकारों के पारंपरिक वाद्य यंत्रों, ध्वज-पताकाओं और सांस्कृतिक वेशभूषा ने समूचे मार्ग को राजस्थानी संस्कृति के रंगों में रंग दिया।
पारंपरिक खेलों और कला का प्रदर्शन
यात्रा में क्रीड़ा भारती के खिलाड़ियों ने स्केटिंग, साइकिलिंग, कबड्डी, फुटबॉल और राजस्थान के पारंपरिक खेल ‘सतोलिया’ का प्रदर्शन कर युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया।
महारानी कॉलेज पहुंचने पर छात्राओं ने ढोल-नगाड़ों, शहनाई वादन, कच्छी घोड़ी और तिलक लगाकर यात्रा का स्वागत किया। कॉलेज के मुख्य सभागार व परिसरों में कालबेलिया, भवई, चरी, कठपुतली नृत्य और मांड़ गायन की प्रस्तुतियां हुईं। इसके अलावा बाबा रामदेवजी, वीर तेजाजी और संत रविदासजी की भव्य झांकियां श्रद्धालुओं और दर्शकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं।
लोकमंथन से होगा लोकमंगल का मार्ग प्रशस्त
समारोह को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी लोक संस्कृति में बसती है। लोक जीवन के मूल्य सदैव प्रकृति, पर्यावरण और संतुलित जीवनशैली का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि लोक से जुड़ाव ही वास्तव में लोककल्याण का आधार है।
उल्लेखनीय है कि यह यात्रा 4 से 6 दिसंबर तक जवाहर कला केंद्र में आयोजित होने वाले ‘लोकमंथन-2026’ के पूर्वाभ्यास के रूप में निकाली गई। ‘हम भारत के लोग’ थीम पर होने वाले इस तीन दिवसीय महासंगम में देशभर के जाने-माने विचारक, शिक्षाविद, शोधकर्ता और लोक साधक हिस्सा लेंगे।



















