जयपुर। भारत सरकार के ‘विकसित भारत’ अभियान के तहत गुरुवार को जयपुर शहर के प्रमुख मंदिरों में विशेष रंगोली सजावट कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में गुप्त वृंदावन धाम में भी आकर्षक एवं मनमोहक रंगोली सजाई गई। रंगोली ने मंदिर परिसर में आध्यात्मिक और उत्सवी वातावरण को और भव्य बना दिया।
गुप्त वृंदावन धाम में करीब 15 श्रद्धालुओं और भक्तों ने लगभग चार घंटे की सेवा के बाद विशाल रंगोली को पूर्ण रूप दिया। भक्तों ने निस्वार्थ भाव से श्रमदान कर इस आयोजन को सफल बनाया।
मंदिर में गुरुवार का दिन दोहरे विशेष अवसर के रूप में मनाया गया। गौड़ीय वैष्णव परंपरा के सप्तम गोस्वामी श्रील भक्तिविनोद ठाकुर की आविर्भाव तिथि पर विशेष स्मरण और श्रद्धांजलि कार्यक्रम हुआ। वर्ष 1838 में जन्मे भक्तिविनोद ठाकुर बहुभाषाविद और विद्वान थे। उन्होंने महाप्रभु श्री चैतन्य देव के जन्मस्थान की खोज कर उसे व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भक्तिविनोद ठाकुर ने वैदिक शास्त्रों और सनातन धर्म के साहित्य को अंग्रेजी भाषा के माध्यम से व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया। उनके प्रयासों से गौड़ीय वैष्णव परंपरा और हरिनाम संकीर्तन के प्रचार-प्रसार को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार हुआ।
इस अवसर पर भक्तों ने रंगोली के समक्ष दीप प्रज्वलित किए और हरिनाम संकीर्तन किया। भक्तों ने श्रील भक्तिविनोद ठाकुर को भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित करते हुए ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आयोजन में सहभागिता की।



















