6.80 करोड़ के ‘बॉस स्कैम’ मामले में बीकानेर से आरोपी गिरफ्तार

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जयपुर। राजस्थान पुलिस के सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन जयपुर ने 6.80 करोड़ रुपए के चर्चित ‘बॉस स्कैम’ साइबर ठगी प्रकरण में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने बीकानेर से लक्ष्मण सिंह उर्फ नीशू को पकड़ा है। आरोप है कि वह साइबर ठगों को बैंक खाते, एटीएम और सिम उपलब्ध कराने के साथ गिरोह के सदस्यों के रहने-ठहरने और अन्य लॉजिस्टिक इंतजाम करता था। इस मामले में अब तक 12 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। फिलहाल आरोपित से पूछताछ की जा रही है।

डीआईजी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह के अनुसार गिरोह साइबर ठगी की रकम को म्यूल बैंक खातों, एटीएम, चेक, यूपीआई, क्यूआर कोड, डिजिटल वॉलेट और यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी के जरिए अलग-अलग स्तरों पर घुमाता था। टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से बैंक खाते, पासबुक, एटीएम, चेकबुक और सिम की किट उपलब्ध कराई जाती थी।

रकम आने के बाद उसे तत्काल नकद निकाला या दूसरे खातों में ट्रांसफर किया जाता था। कई खातों में लेयरिंग के बाद रकम को बिनेंस जैसे क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और टेलीग्राम पर उपलब्ध क्यूआर कोड के जरिए यूएसडीटी में बदलकर आगे भेजा जाता था।

गिरोह फर्जी पहचान अथवा वॉट्सऐप पर कंपनी के उच्च अधिकारी या बॉस की फोटो और नाम का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को विश्वास में लेता था। इसके बाद भुगतान या ट्रांसफर के निर्देश देकर ठगी की रकम म्यूल खातों में पहुंचाई जाती थी। जांच में सामने आया है कि इस मामले में साइबर अपराधियों ने कंपनी के निदेशक की पहचान और पुरानी वॉट्सऐप बातचीत का इस्तेमाल कर अकाउंट्स हेड से करोड़ों रुपए ट्रांसफर करवाए थे।

पूछताछ में लक्ष्मण सिंह ने पुलिस को बताया कि वह टेलीग्राम के ‘एफटूएफ जयपुर दिल्ली ’ ग्रुप के जरिए साइबर ठगों के संपर्क में आया था। उसका काम रींगस और बीकानेर आने वाले गिरोह के सदस्यों को रिसीव करना, होटल में ठहराना और लॉजिस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराना था।

पुलिस के अनुसार 23 अगस्त 2026 को संदीप कुमार के रींगस आने पर लक्ष्मण ने दीपक सिंह और युवराज सिंह के जरिए उसे होटल में ठहराया। इसके बाद संदीप से बैंक खाता, एटीएम, पासबुक, चेकबुक और लिंक सिम लेकर उसकी जानकारी टेलीग्राम ग्रुप में साझा की गई।

सिम को दूसरे मोबाइल में लगाकर एपीके लिंक के जरिए बैंकिंग लेन-देन कराया गया और ठगी की रकम ट्रांसफर की गई। इस काम के बदले लक्ष्मण को 1000 रुपए प्रतिदिन तथा काम सफल होने पर 5000 रुपए अतिरिक्त बोनस मिलता था। पुलिस अब वॉट्सऐप, टेलीग्राम रिकॉर्ड, सीडीआर, आईपीडीआर और बैंकिंग मनी ट्रेल का विश्लेषण कर गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क का पता लगा रही है।

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