संस्कृत हिंदी की शब्द-शक्ति का आधार: कोसलेंद्रदास

0
36

जयपुर। जोरावर सिंह गेट स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में बुधवार को हिंदी पखवाड़े का समापन समारोह आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के दर्शन संकायाध्यक्ष शास्त्री कोसलेंद्रदास ने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि हिंदी की शब्द-संपदा और वैचारिक शक्ति का प्रमुख आधार है। संविधान के अनुच्छेद 351 में भी हिंदी को समृद्ध करने के लिए संस्कृत से शब्द ग्रहण करने का उल्लेख है। दूरदर्शन, दूरभाष, लोकतंत्र, संविधान, संसद और विश्वविद्यालय जैसे शब्द इसकी शब्द-निर्माण क्षमता के उदाहरण हैं।

पखवाड़े के दौरान संस्थान के विभिन्न विभागों में चिकित्सकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी के प्रति रुचि, अभिव्यक्ति-कौशल, रचनात्मकता और राजभाषा के प्रयोग को बढ़ावा देना रहा। इस दौरान प्रो. पी. हेमंता, प्रो. अनिता शर्मा, डॉ. सुमन शर्मा, डॉ. राकेश नागर सहित विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, शिक्षक और कर्मचारी मौजूद रहे।

विश्व हृदय दिवस के अवसर पर आयुर्-योग प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी विभाग की ओर से 15 दिवसीय हाइब्रिड सर्टिफिकेट कोर्स के अंतिम तीन दिवसीय प्रायोगिक प्रशिक्षण का समापन हुआ। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने प्रशिक्षुओं को प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी के सैद्धांतिक और प्रायोगिक पक्षों की जानकारी दी। प्रो. पी. हेमंता, प्रो. एच.एम.एल. मीणा और प्रो. उदय कुमार सरोज ने प्रशिक्षु-प्रशिक्षकों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए। पोस्टर प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here