जयपुर। दशहरे का पर्व 20 अक्टूबर को धूमधाम से मनाया जाएगा। राजधानी में पर्व की तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के आदर्श नगर, शास्त्री नगर, मानसरोवर, प्रताप नगर, टोंक रोड, सोडाला, राजापार्क, गुर्जर की थड़ी और आतिश मार्केट सहित कई इलाकों में रावण और कुंभकरण के पुतले बनने लगे हैं। कारीगर बांस, कागज और कपड़े की मदद से विशालकाय पुतले तैयार करने में जुटे हैं। रंग-बिरंगे पुतलों को देखकर राहगीर भी रुक कर कारीगरों की कला निहार रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जयपुर में रावण और कुंभकरण के पुतले तैयार करने के काम में करीब 150 से 200 परिवार जुटे हुए हैं। इन परिवारों को दशहरे पर होने वाली बिक्री से अच्छी कमाई की उम्मीद है। हालांकि, इस बार महंगाई और बारिश की आशंका ने कारीगरों की चिंता बढ़ा दी है।

कागज महंगा, बांस की कीमतों में भी बढ़ोतरी
कारीगरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और मौसम की अनिश्चितता है। कागज की कीमत दोगुनी होने और बांस के दाम बढ़ने से पुतले बनाने की लागत बढ़ गई है। वहीं, बारिश होने पर तैयार पुतलों को सुरक्षित रखना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में कारीगरों को समय पर पुतले तैयार करने के साथ उन्हें सुरक्षित रखने की भी चिंता सता रही है।
250 रुपए से 60 हजार रुपए तक के पुतले
महंगाई का असर इस बार रावण के पुतलों की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। जयपुर में 250 रुपए से लेकर 60 हजार रुपए तक के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। छोटे पुतलों की कीमत 3 से 5 हजार रुपए तक है, जबकि 25 से 30 फीट ऊंचे पुतले 20 से 30 हजार रुपए में बिकने की उम्मीद है। वहीं, 55 फीट ऊंचे रावण के पुतले की कीमत करीब 60 हजार रुपए तक रखी गई है।
बच्चों के लिए भी आकर्षक और छोटे आकार के पुतले बनाए जा रहे हैं। इनकी कीमत 250 से 300 रुपए तक है। अलग-अलग आकार और कीमतों के पुतले तैयार होने से लोग अपनी जरूरत और बजट के अनुसार खरीदारी कर सकेंगे।
कई इलाकों में होगा रावण दहन
मानसरोवर, झोटवाड़ा, आदर्श नगर और विद्याधर नगर सहित शहर के विभिन्न इलाकों में दशहरे पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित होंगे। आयोजन समितियों ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। बारिश और महंगाई की चुनौतियों के बावजूद लोगों में पर्व को लेकर उत्साह बना हुआ है।

कारीगरों को बिक्री से उम्मीद
रावण के पुतले बनाने वाले कारीगरों और कारोबारियों को दशहरे के कारोबार से काफी उम्मीदें हैं। उनका कहना है कि अच्छी बिक्री होने से परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी। कई कारीगर दशहरे के बाद दीपावली और परिवार में बहन-बेटियों की शादियों सहित अन्य जरूरी खर्चों की तैयारी भी इसी कमाई के भरोसे करते हैं।



















