रथयात्राओं में शामिल यात्रियों और संत-महंतों का जयपुर में होगा सम्मान

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जयपुर। संयुक्त भारतीय धर्म संसद के तत्वावधान में तथा मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के महंत डॉ. नरेश पुरी जी महाराज के सानिध्य में पिछले 3 वर्षों से चलाया जा रहा ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति अभियान’ अपने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुँच गया है। इस अभियान के तहत देश के चारों धामों—द्वारिका, बद्रीनाथ, रामेश्वरम् और जगन्नाथपुरी से मथुरा तक निकाली गईं चारों रथयात्राएं सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुकी हैं। इस पावन उपलब्धि के उपलक्ष्य में 1 नवंबर को जयपुर स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एक भव्य समापन समारोह का आयोजन किया जाएगा।

इस विशेष कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने राजभवन में समारोह के आधिकारिक पोस्टर का विमोचन किया और अभियान की सफलता की कामना की। इस अवसर पर अभियान का नेतृत्व कर रहे संयुक्त भारतीय धर्म संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य राजेश्वर, जयपुर के भक्त कवि डॉ. कैलाश परवाल, सुदीप तिवारी, प्रमोद शर्मा, दीपेश शर्मा और पंकज शर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

संयुक्त भारतीय धर्म संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य राजेश्वर ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि 1 नवंबर को आयोजित होने वाले समापन समारोह में चारों धामों की यात्राओं में शामिल हुए यात्री दल के सदस्यों का सम्मान किया जाएगा। अभियान में निरंतर सहयोग देने वाले विभिन्न मठ-मंदिरों के पूज्य संतों और महंतों का अभिनंदन किया जाएगा।

पिछले 3 वर्षों के दौरान इस अभियान ने देशभर में सनातन चेतना जगाने का कार्य किया है। यात्रा के दौरान 400 से अधिक स्थानों पर छोटी-बड़ी धर्म सभाओं का आयोजन किया गया। इस अवधि में जयपुर के भक्त कवि डॉ. कैलाश परवाल द्वारा रचित ‘श्रीकृष्णम महाकाव्य’ का भी जगह-जगह सस्वर पाठ किया गया, जिसे श्रद्धालुओं का व्यापक समर्थन मिला।

आचार्य राजेश्वर ने बताया कि इन चारों रथयात्राओं में संत समाज के साथ-साथ आम सनातनियों का भरपूर समर्थन प्राप्त हुआ है। उन्होंने आगे की रणनीति साझा करते हुए कहा कि भविष्य में इस अभियान को व्यापक स्तर पर पूरे देश में चलाया जाएगा, जिसके तहत मथुरा और देश की राजधानी दिल्ली में बड़ी धर्म सभाओं का आयोजन किया जाएगा।

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