जयपुर। अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र की कामना का पावन पर्व ‘करवा चौथ’ इस वर्ष 29 अक्टूबर को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की दीर्घायु और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखेंगी। सायंकाल में महिलाएं भगवान गणेश, माता पार्वती और चौथ माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर चंद्र दर्शन करेंगी और पति के हाथों जल ग्रहण कर अपना व्रत पूर्ण करेंगी।
पंडित राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि 29 अक्टूबर को करवा चौथ के अवसर पर बुध और शुक्र के अद्भुत संयोग से ‘लक्ष्मी-नारायण राजयोग’ का निर्माण हो रहा है, जिससे इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ गया है। धार्मिक ग्रंथों जैसे ‘धर्मसिंधु’ और ‘निर्णयसिंधु’ में इस व्रत को ‘करक चतुर्थी’ के नाम से संबोधित किया गया है, जहाँ ‘करक’ का अर्थ जल के छोटे मिट्टी के बर्तन यानी ‘करवा’ से है।
व्रत और पूजन के लिहाज से यह दिन बेहद खास रहेगा। आचार्यों के अनुसार करवा चौथ पर पूजन के लिए शुभ समय और चंद्रोदय की स्थिति इस प्रकार रहेगी। पूजा का शुभ मुहूर्त: – सायं 4:21 बजे से रात्रि 8:56 बजे तक, चंद्रोदय का समय: – रात्रि 8:25 से 8:56 बजे के मध्य चंद्रमा का उदय होगा, जिसके पश्चात अर्घ्य देकर व्रत खोला जाएगा।

















