जयपुर। जयपुर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (जयपुर डेयरी) ने दुग्ध गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए एक बेहद अभिनव और आधुनिक पहल की शुरुआत की है। डेयरी द्वारा शुरू की गई “सरस चल (मोबाइल) प्रयोगशाला” अब सीधे ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध सहकारी समितियों तक पहुंचकर मौके पर ही दूध के नमूनों की सटीक जांच कर रही है।
पशुपालन, डेयरी एवं गोपालन विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि इस मोबाइल प्रयोगशाला की सबसे बड़ी ताकत इसमें स्थापित अत्याधुनिक मशीन है। डेनमार्क से आयातित यह मशीन एफ.टी.आई.आर. (फुरियर ट्रांसफॉर्म इन्फ्रारेड) तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक की खासियत यह है कि यह महज एक ही टेस्ट में दूध के 24 अलग-अलग मानकों की बारीकी से जांच कर देती है।
इसमें फैट, एस.एन.एफ., प्रोटीन, लैक्टोज के साथ-साथ दूध में होने वाली किसी भी संभावित मिलावट की शत-प्रतिशत सटीक रिपोर्ट सामने आ जाती है। यह चलती-फिरती प्रयोगशाला बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे दुग्ध समितियों पर पहुंचती है। अब तक जयपुर डेयरी क्षेत्र की लगभग 612 दुग्ध सहकारी समितियों में आकस्मिक निरीक्षण (सरप्राइज चेकिंग) किया जा चुका है। इस कड़े रुख से दूध में मिलावट करने वाले तत्वों पर प्रभावी लगाम लगी है।
इस पारदर्शी व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा सीधे तौर पर दुग्ध उत्पादक किसानों और आम उपभोक्ताओं को मिल रहा है। श्री कुमावत ने कहा कि मौके पर ही सटीक जांच होने से किसानों को उनके दूध की वास्तविक गुणवत्ता के आधार पर सही और पूरा भुगतान मिलना सुनिश्चित हुआ है।
मिलावट पर कड़ा नियंत्रण होने से शहरी उपभोक्ताओं तक पूरी तरह शुद्ध और सुरक्षित दुग्ध उत्पाद पहुंच रहे हैं। यह क्रांतिकारी कदम न केवल व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत कर रहा है, बल्कि जयपुर डेयरी की तकनीकी उन्नति और उपभोक्ताओं के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता का भी जीवंत प्रमाण है।

















