तिथियों के फेर से धनतेरस से भाई दूज तक छह दिन चलेगा दीपोत्सव

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जयपुर। इस बार दीपावली का पांच दिवसीय पर्व तिथियों के विशेष संयोग के चलते छह दिनों में मनाया जाएगा। धनतेरस से भाई दूज तक होने वाले दीपोत्सव के बीच 9 नवंबर को सोमवती अमावस्या पड़ने से दीपावली और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अंतर रहेगा। हालांकि, इस दिन भी दीपदान और धार्मिक अनुष्ठान होंगे। इस तरह 6 नवंबर से शुरू होने वाला दीपोत्सव 11 नवंबर तक चलेगा।

ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा के अनुसार धनतेरस, नरक चतुर्दशी और दीपावली के पर्वों का निर्धारण रात्रि की तिथि और मुहूर्त के आधार पर किया जाता है, जबकि गोवर्धन पूजा और भाई दूज में उदयातिथि का विचार किया जाता है। इसी तिथि गणना के कारण इस बार पर्वों के क्रम में बदलाव देखने को मिलेगा।

दीपोत्सव की शुरुआत 6 नवंबर को धनतेरस से होगी। इस दिन सुबह 10:30 बजे त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी, जो अगले दिन सूर्योदय के बाद तक रहेगी। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा की जाएगी। इस दिन सोना-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी का विशेष महत्व है।

7 नवंबर को नरक चतुर्दशी यानी छोटी दीपावली मनाई जाएगी। इस दिन सुबह 10:47 बजे चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। ज्योतिषाचार्य शर्मा के अनुसार रात्रि में चतुर्दशी तिथि रहने से नरक चतुर्दशी इसी दिन मनाई जाएगी। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, अभ्यंग स्नान और दीपदान की परंपरा है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध किया था।

8 नवंबर को लक्ष्मी पूजन

दीपावली पर इस बार अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होगी, जो पूरी शाम और रात्रि में रहेगी। 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक अमावस्या तिथि रहेगी। ऐसे में दीपावली का मुख्य पर्व 8 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन प्रदोष काल और रात्रि में मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व रहेगा। घरों, प्रतिष्ठानों और मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलित कर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी।

9 को सोमवती अमावस्या, 10 को अन्नकूट

दीपावली के अगले दिन 9 नवंबर को सोमवार होने से सोमवती अमावस्या का संयोग रहेगा। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पूजन और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। श्रद्धालु पितरों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए धार्मिक अनुष्ठान करेंगे।

ज्योतिषाचार्य शर्मा के अनुसार प्रतिपदा अमावस्या से युक्त होने पर उस दिन गोवर्धन पूजा नहीं की जाती। इसी कारण इस बार गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को होगी। इसे अन्नकूट महोत्सव भी कहा जाता है। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना के साथ अन्नकूट का भोग लगाया जाएगा और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा।

11 नवंबर को भाई दूज

दीपोत्सव का समापन 11 नवंबर को भाई दूज के साथ होगा। इस दिन बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करेंगी। यह पर्व भाई-बहन के स्नेह और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती का प्रतीक है।

इस बार 9 नवंबर को पर्वों के बीच का दिन होने के बावजूद दीपदान की परंपरा जारी रहेगी। सोमवती अमावस्या पर भी श्रद्धालु दीप जलाएंगे। इस तरह धनतेरस से भाई दूज तक छह दिनों तक दीपों की रोशनी और धार्मिक आयोजनों का सिलसिला बना रहेगा।

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