‘मंथन’ में सामाजिक सरोकार और वैचारिक गहराई का संगम

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जयपुर। लेखिका रजनी मिश्रा की नवीनतम पुस्तक ‘मंथन’ का विमोचन रविवार को होटल गणगौर के सभागार में गलता पीठाधीश्वर अवधेशाचार्य महाराज के सान्निध्य में हुआ। इस अवसर पर साहित्य संगोष्ठी एवं पुस्तक परिचर्चा भी आयोजित की गई। समारोह में साहित्य, शिक्षा और आध्यात्मिक जगत से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रशासनिक अधिकारी डॉ. सूरज सिंह नेगी ने कहा कि साहित्य में समाज का हित निहित हो, तभी सृजन सार्थक होता है। उन्होंने रजनी मिश्रा के लेखन में सामाजिक प्रतिबद्धता, सांस्कृतिक सरोकार और उद्देश्यपरकता की सराहना की।

अवधेशाचार्य महाराज ने कहा कि जयपुर की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को जीवंत रखना सभी की जिम्मेदारी है। साहित्यकार समाज के विभिन्न विषयों पर निर्भीक और सार्थक लेखन करें, ताकि साहित्य समाज को मार्गदर्शन और नई पीढ़ी को दिशा दे सके।

अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार एवं आईएएस अधिकारी टीकम चंद बोहरा ने कहा कि श्रेष्ठ साहित्य पाठक के मन में प्रश्न पैदा कर उसे सोचने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने ‘मंथन’ में विषयों की विविधता, वैचारिक गहराई और भाषा की सहजता के संतुलन की सराहना की।

वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रेखा गुप्ता ने पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कहा कि इसके आलेख वैचारिक मंथन के साथ आत्ममंथन की प्रेरणा देते हैं। डॉ. आशा शर्मा ने प्रभावी शैली में मंच संचालन किया और पुस्तक के उद्धरणों के जरिए इसके भाव पक्ष को सामने रखा। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बजरंग सोनी ने आलेखों के गूढ़ और अंतर्निहित अर्थों पर विचार व्यक्त किए।

दो वर्ष में पूरी हुई पुस्तक

लेखिका रजनी मिश्रा ने बताया कि ‘मंथन’ को पूरा करने में दो वर्ष का सतत लेखन लगा। विभिन्न विषयों को संक्षिप्त, सारगर्भित और प्रभावी रूप में प्रस्तुत करते हुए उन्होंने इसे ‘गागर में सागर’ भरने का प्रयास बताया। यह उनकी चौथी पुस्तक है। उन्हें पूर्व में भी लेखन के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं।

कार्यक्रम में डॉ. सुधीर भंडारी, डॉ. सपना मिश्रा, युवराज राघवेंद्र, अनन्ता और अष्टसिद्ध मिश्रा सहित अन्य साहित्यकारों ने पुस्तक पर विचार रखे। साहित्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया गया। अंत में स्वामी राघवेंद्र ने अतिथियों और साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त किया।

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