शनिश्चरी अमावस्या 16 मई को बना विशेष संयोग

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जयपुर। पंचांग के अनुसार इस बार शनि जयंती और अमावस्या बेहद खास और फलदायी रहेगी। ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाने वाली शनि जयंती इस बार 16 मई शनिवार को मनाई जाएगी। शनि जयंती और ज्येष्ठ अमावस्या का दुर्लभ संयोग शनिवार के दिन पड़ रहा है, जिसे ‘शनिश्चरी अमावस्या’ कहा जाता है। इस दिन शनि देव अपनी स्वराशि कुंभ में रहकर शश महापुरुष राजयोग बना रहे हैं। इसके साथ ही, सूर्य, शनि और चंद्रमा की विशेष स्थिति से धन-समृद्धि और सुख में वृद्धि का अत्यंत शक्तिशाली योग बन रहा है।

पंडित राजेश शर्मा के अनुसार अमावस्या तिथि का प्रारंभ 16 मई, प्रातः 5:11 बजे से वहीं समापन 17 मई को देर रात 1:30 बजे तक होगा। जातकों के लिए इस दिन ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:07 से 4:48 तक (साधना के लिए श्रेष्ठ समय) रहेगा। इसके अलावा इस दिन के विशेष संयोग में सौभाग्य योग सुबह 10:26 बजे तक और शोभन योग 16 मई, शनिवार को शुरू होकर 17 मई की सुबह 6:15 बजे तक रहेगा।

शनि देव को ब्रह्मांड का मुख्य न्यायाधीश या ‘न्याय का देवता’ माना जाता है। वे किसी भी व्यक्ति को उसके अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि जयंती का दिन सोए हुए भाग्य को जगाने का एक ‘सुनहरा अवसर’ होता है। इस दिन सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा न केवल जीवन के संघर्षों को कम करती है, बल्कि अटूट समृद्धि और मानसिक शांति का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

पं. विद्रोही के अनुसार, जिन जातकों की कुंडली में वर्तमान में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उनके लिए यह दिन किसी वरदान से कम नहीं है। शनिवार को पड़ने वाली शनि जयंती पर किए गए विशेष उपाय कष्टों की तीव्रता को कम कर देते हैं और नकारात्मक प्रभावों को शांत करते हैं।

इस दिन शनिदेव की विशेष कृपा पाने के लिए तैलाभिषेक होंगे। इस दिन शनि देव की प्रतिमा पर सरसों का तेल अर्पित करने से शनिदेव प्रसन्न होते है। मान्यता है कि इससे शनि दोष तत्काल शांत होते हैं।

इस दिन काली उड़द, काले तिल, लोहे के बर्तन और अनाज का दान करना विशेष फलदायी है और इस दान का महत्व भी है। संध्या काल में पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाने से विपदा का हरन और सुख-समृद्धि आती है।

विद्वानों के अनुसार इस दिन शनिदेव का विशेष मंत्र ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ का जाप और शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए इससे जीवन की परेशानी दूर होती हैं। इसके साथ ही ग्रह शांति के लिए इस दिन हवन करना और उपवास रखकर शनि मंदिरों के दर्शन करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।

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