जयपुर। जयपुर दुर्गाबाड़ी एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव में रविवार को महाअष्टमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बाद प्रातः 8 बजे विधि-विधान से महाअष्टमी पूजा संपन्न हुई। दिनभर मां दुर्गा के दर्शन और पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। मंत्रोच्चार और ढाक की थाप से दुर्गाबाड़ी परिसर भक्तिमय हो उठा।
बंगाली परंपरा में महाअष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वस्त्र धारण कर मां दुर्गा के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित की। कई भक्तों ने पुष्पांजलि तक निर्जला उपवास रखकर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की।
5 हजार श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाभोग
दोपहर 12 बजे भोग आरती के बाद करीब 5 हजार श्रद्धालुओं को पारंपरिक बंगाली महाभोग वितरित किया गया। इसमें खिचुड़ी, खीर, लाबड़ा और टमाटर की चटनी परोसी गई। महाभोग वितरण में दुर्गाबाड़ी एसोसिएशन के सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘त्राहि दुर्गे’ नृत्य-नाटिका ने मोहा मन
संध्या आरती के बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में दुर्गाबाड़ी की महिलाओं ने ‘त्राहि दुर्गे’ नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। इसमें मां दुर्गा के सृजन, पालन और संहार के विभिन्न स्वरूपों को नृत्य और संगीत के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उल्लेखनीय है कि जयपुर दुर्गाबाड़ी एसोसिएशन पिछले 70 वर्षों से दुर्गा पूजा महोत्सव का आयोजन कर बंगाली संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामुदायिक एकता को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।



















