जयपुर। एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के साथ दिल्ली में कथित मारपीट और बर्बरता के मामले में जीरो एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर कांग्रेस और जयपुर पुलिस के बीच विवाद गहरा गया है। पुलिस कमिश्नर की ओर से जीरो एफआईआर दर्ज नहीं करने के कारण लिखित में दिए जाने के बाद बुधवार को कांग्रेस ने पुलिस कमिश्नरेट के बाहर चल रहा धरना समाप्त कर न्यायालय की शरण लेने का निर्णय किया। वहीं पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने पुलिस का पक्ष रखते हुए कहा कि दिल्ली में मामले की कानूनी कार्रवाई जारी है और ऐसे में जयपुर में जीरो एफआईआर दर्ज करने का कानूनी आधार नहीं बनता।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस नेता दो दिन पहले रितु बराला के साथ हुई कथित बर्बरता के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे थे। उनका आरोप है कि अधिकारियों ने इंतजार करने को कहा, लेकिन कांग्रेस नेताओं से बातचीत नहीं की। इसके बाद कांग्रेस नेता कमिश्नरेट में धरने पर बैठ गए, जबकि कार्यकर्ताओं ने बाहर आंदोलन किया। डोटासरा के अनुसार, दो दिन तक धरना देने के बावजूद उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई।
डोटासरा ने कहा कि पुलिस कमिश्नर की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 के प्रावधानों का हवाला देते हुए लिखित में बताया गया कि दिल्ली में शिकायत दिए जाने के कारण राजस्थान पुलिस को जीरो एफआईआर दर्ज करने का क्षेत्राधिकार नहीं है। उन्होंने इसे कानून की गलत व्याख्या बताते हुए आरोप लगाया कि रितु बराला की शिकायत पर न तो दिल्ली में और न ही किसी अन्य स्थान पर एफआईआर दर्ज हुई है। ऐसे में राजस्थान पुलिस का प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार करना उचित नहीं है।
उन्होंने भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन पर दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस रितु बराला को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेगी। पार्टी ने जीरो एफआईआर दर्ज नहीं करने और कानून की कथित गलत व्याख्या के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय जाने का निर्णय किया है।
19 अक्टूबर को मोतीडूंगरी थाने पहुंची थीं रितु
पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने बुधवार को पुलिस का पक्ष रखते हुए बताया कि रितु बराला 19 अक्टूबर को मोतीडूंगरी थाने पहुंची थीं। वह अपने साथ 13 अक्टूबर को दिल्ली में हुई घटना से संबंधित शिकायत की प्रति लेकर आई थीं। पुलिस ने शिकायत की प्रति लेने के बाद दिल्ली पुलिस से मामले की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी। दिल्ली पुलिस ने बताया कि प्रकरण में कानूनी कार्रवाई जारी है।
मित्तल ने कहा कि घटना के संबंध में कनॉट प्लेस थाना संबंधित थाना था और परिवादी वहां घटना की सूचना दे चुकी थीं। ऐसे में जयपुर में जीरो एफआईआर दर्ज करना कानूनन उचित नहीं था। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेताओं को इस संबंध में दो दिन पहले ही जानकारी दे दी गई थी।
परिवादी के थाने पहुंचने में असमर्थ होने पर दर्ज होती है जीरो एफआईआर
पुलिस कमिश्नर ने कहा कि जीरो एफआईआर सामान्यतः ऐसी परिस्थितियों में दर्ज की जाती है, जब परिवादी संबंधित थाने तक पहुंचने में असमर्थ हो या उसे किसी प्रकार का भय हो। रितु बराला पहले ही संबंधित थाने में शिकायत दे चुकी थीं और दिल्ली पुलिस में कानूनी कार्रवाई जारी होने की जानकारी मिली थी। इसलिए जयपुर में जीरो एफआईआर दर्ज करने का आधार नहीं बनता था।
मित्तल ने बताया कि कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस से इस संबंध में लिखित जवाब मांगा था, जिसके बाद उन्हें लिखित में जानकारी दे दी गई। केरल में इसी तरह के मामले में एफआईआर दर्ज होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वहां किन परिस्थितियों में प्राथमिकी दर्ज की गई, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। जयपुर पुलिस ने रितु बराला के मामले में दिल्ली पुलिस से जानकारी लेकर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को स्थिति से अवगत कराया है।
धरने पर कार्रवाई के संकेत
पुलिस कमिश्नर ने पुलिस कमिश्नरेट परिसर में कांग्रेस के धरने को लेकर भी कार्रवाई के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाएगा। कांग्रेस नेताओं से मुलाकात नहीं करने के आरोपों को खारिज करते हुए मित्तल ने कहा कि पुलिस की ओर से पहले दिन ही जानकारी दे दी गई थी।
अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर ने भी मंगलवार को कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। ऐसे में पुलिस की ओर से संवाद में कमी नहीं रही। इधर कांग्रेस ने धरना समाप्त करने के साथ ही न्यायालय जाने का निर्णय दोहराया। डोटासरा ने कहा कि राजस्थान की बेटी को न्याय दिलाने और प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कराने के लिए पार्टी हरसंभव कानूनी कदम उठाएगी।

















