July 16, 2024, 5:05 am
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महिला सफाई कर्मचारी रिश्वत मामला: सफाईकर्मी से बनी थी आरएस, नहीं थी नौकरी ज्वाइनआईएएस बनने की तैयारी कर रही थी

जयपुर। प्रदेश के सभी नगर निगम के साथ स्थानीय निकायों में चल रही सफाई कर्मचारी की भर्ती में नौकरी लगवाने के नाम पर अभ्यथियों से रुपए एकत्रित कर रही नगर निगम हैरिटेज की महिला सफाई कर्मचारी,उसके पुत्र और एक दलाल को एसीबी ने बुधवार देर रत को दबोचा है। एसीबी ने उनकी कार से 1.75 लाख रुपए भी बरामद किए थे। एसीबी ने इस कार्रवाई को पाली के जैतारण-बर रोड पर शीतल होटल में अंजाम दिया गया था।

एसीबी के डीजी डॉ. रवि प्रकाश मेहरड़ा ने बताया कि पकड़ी गई महिला नगर निगम जयपुर हेरिटेज के वार्ड-19 में सफाईकर्मी थी। महिला के साथ उसके बेटे ऋषभ और दलाल योगेंद्र चौधरी को भी पकड़ा गया। आशा अलग-अलग जिलों में लोगों को सफाई कर्मचारी के पद पर भर्ती करवाने के नाम पर रुपए इकट्ठे कर रही थी। एसीबी टीम ने कार से 1.75 लाख रुपए भी बरामद किए।

सफाईकर्मी की नौकरी करते-करते राजस्थान प्रशासनिक सेवा में चयनित होने वाली आशा कंडारा को एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। महिला के साथ उसके बेटे ऋषभ और दलाल योगेंद्र चौधरी उर्फ रवि को भी पकड़ा है। एसीबी टीम ने कार से 1.75 लाख रुपए भी बरामद किए। घूस लेते पकड़ी गई महिला सफाईकर्मी को निलंबित कर दिया है। अजमेर से इंस्पेक्टर कंचन भाटी और पाली से इंस्पेक्टर चैनप्रकाश चौधरी ने टीम के साथ इनका पीछा किया।

बुधवार रात को जयपुर आने के दौरान हाईवे पर एक होटल पर पैसों के साथ पकड़ लिया। एसीबी को जानकारी मिली थी मंगलवार रात को महिला जयपुर से पाली के लिए निकली थी। जैतारण में उसका बेटा ऋषभ रुपए लेकर आया था। उसके साथ दलाल योगेंद्र चौधरी भी था। जैतारण-बर के बीच होटल शीतल में रुके थे। नौकरी का सौदा साढ़े तीन लाख में किया था।

आरएएस में हो गया था चयन, ज्वाइन नहीं की थी नौकरी

जानकारी के अनुसार आरएस-2018 भर्ती में आशा का चयन हो गया था, उसकी 728वीं रैंक थी। हालांकि उसने जॉइन नहीं किया था। बताया जा रहा है कि एसडीएम का पद नहीं मिलने के कारण उसने जॉइनिंग नहीं ली थी। जोधपुर के बाद महिला का ट्रांसफर नगर निगम जयपुर हेरिटेज में हो गया था। वर्तमान में महिला की ड्यूटी वार्ड 19 में लगी थी। वह आईएएस बनना चाहती है और इसके लिए यूपीएससी की तैयारी कर रही है। आशा कंडारा की शादी 1997 में हुई थी।

करीब 7 साल बाद 2004-2005 में पति से अलग रहने लगी थी। दो बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी निभाते हुए पहले ग्रेजुएशन किया था। फिर 2018 में आरएएस की परीक्षा दी थी। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए आशा ने सफाई कर्मचारी की भर्ती परीक्षा भी इसी दौरान दी थी। आरएएस परीक्षा के 12 दिन बाद ही उसकी नियुक्ति सफाई कर्मचारी के पद पर हुई थी। हालांकि आरएएसके नतीजों के लिए आशा को 2 साल इंतजार करना पड़ा। पिता राजेंद्र कंडारा अकाउंटेंट सेवा से रिटायर हो चुके हैं।

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