ज्येष्ठ पुरुषोत्तम मास आज से: छोटीकाशी में कथा-संकीर्तन और धार्मिक आयोजनों की रहेगी धूम

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Jyeshtha Purushottam month starts today
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जयपुर। छोटीकाशी में रविवार से ज्येष्ठ अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास का शुभारंभ होगा, जो 15 जून तक चलेगा। लगभग तीन वर्ष बाद आए इस विशेष संयोग को लेकर मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भक्ति एवं साधना का वातावरण बन गया है। एक माह तक शहरभर में कथा-संकीर्तन, रामचरितमानस के अखंड पाठ, यज्ञ, सत्संग और विशेष धार्मिक आयोजन होंगे।

पंडित बनवारी लल शर्मा ने बताया कि शास्त्रों में अधिकमास को साधना, जप-तप, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। हालांकि इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, लेकिन आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह मास विशेष महत्व रखता है। इस बार पुरुषोत्तम मास में दो संक्रांतियां, दो पूर्णिमा और दो अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है। साथ ही दो गुरु पुष्य योग भी बनेंगे, जो साधना और मंत्र सिद्धि के लिए विशेष शुभ माने जाते हैं।

शर्मा ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच बनने वाले अंतर को संतुलित करने के लिए अधिकमास जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने इस अतिरिक्त मास को “पुरुषोत्तम” नाम देकर विशेष पवित्रता प्रदान की थी।

गीता गायत्री मंदिर में रामकथा

गलता गेट स्थित श्री गीता गायत्री मंदिर में 17 से 23 मई तक रामकथा का आयोजन होगा। पातालपुरी पीठाधीश्वर बालक देवाचार्य महाराज भक्तों को रामकथा का रसपान कराएंगे। कथा से पूर्व सूरजपोल बाजार स्थित श्री रघुनाथ जी मंदिर से 108 भागवत पोथियों और 108 कलशों की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। महिलाएं पीत वस्त्र धारण कर मंगलगीत गाते हुए यात्रा में शामिल होंगी। इसके बाद 9 से 15 जून तक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन भी होगा।

महावीर नगर में श्री भरत चरित्र कथा

हरिनाम संकीर्तन परिवार के तत्वावधान में महावीर नगर स्थित श्री राम मंदिर में 17 से 21 मई तक पांच दिवसीय श्री भरत चरित्र कथा का आयोजन होगा। कथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जाएगी। व्यासपीठ से अकिंचन महाराज भगवान राम और भरत जी के आदर्श चरित्र का वर्णन करेंगे। आयोजन अग्रवाल महिला मंडल, महावीर नगर द्वारा किया जा रहा है। पुरुषोत्तम मास के दौरान शहर के प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन संध्या और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालु भक्ति और साधना में लीन नजर आएंगे।

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